मेरी कविता - शिवानी देशवाल


वो तेरा रूठना मनाना याद आता है, 

वो तेरा मुस्कुराना याद आता है ।

यूँ तो और भी हैं,रिश्ते नाते नये पुराने,

पर वो तेरा गले लगाना याद आता है।

कितनी बाते हैं जो अनकही ही रह गयी,

कितनी यादें हैं जो पास ही रह गयी,

फिर वो वक़्त लौटा तो लाये कोई,

दूर से देखकर तेरा दौड़ के आना याद आता है।

वो तेरा रोना मुस्कुराना याद आता है।

यूँ तो तेरे गम से पथरा गई है आँखे,

वो तेरी कभी ना खत्म होने वाली बाते,

थाली बजाकर जोर जोर से गाने गाना याद आता है,

वो तेरा रूठना मेरा मनाना याद आता है।

कभी सोचा था किसने तन्हा रह जाऊंगी मैं,

चाहकर भी तुझसे मिल ना पाऊँगी मैं,

रातो को छुपते छुपाते मैगी बनाकर खिलाना याद आता है।

फिर तेरा रूठना मेरा मनाना याद आता है।

कितना दिलदार था तू यार, बड़ा दिल ले गया,

उम्र भर के रिश्ते मे सब कुछ दे गया,

देख मुड़ के तो सही कहाँ छोड़ गया रे तू,

वापस आने के सब रास्ते मोड़ गया रे तू,

कितना खुलकर तेरा चहचहाना याद आता है।

और फिर एक बार वो तेरा रूठना मेरा मनाना याद आता है।



Dedicated to my brother shaheed lt. AKASH CHAUDHARY


Shivani deshwal

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