मेरी बेटी मुखिया हैअन्तिम भाग-शिवानी देशवाल



 नमस्कार दोस्तों  


मेरी ईशू ने बचपन मे ही काफी कुछ झेला है और 2साल तक तो कुछ ज्यादा ही,वैसे कहते हैं कि बुरी बाते और यादे दोनो को ही ज्यादा याद नही करना चाहिए।

घर मे दूध आता था उसमे से 1किलो दूध अलग कर लेते थे कि पिये या ना पिए काम आ जायेगा इसके, वैसे वो ज्यादा दूध पीती भी नही थी अक्सर उलटी या दस्त हो जाते इसलिये मैं उसे दलिया या सूजी की खीर बना के देती और बच गया तो दही जमा के खिला देती।हालाकि कई बार तो दूध ज्यादा गर्मी मे खराब भी हो जाता कारण था घर के रोज खराब हो रहे माहौल के कारण हम ऊपर के कमरे में शिफ्ट कर गये थे,तो मैं रात को खाना बनाने के बाद दूध उबाल के अपने साथ ऊपर ले आती चूंकि ऊपर केवल एक कमरा था रसोई नीचे ही थी।

अक्सर सुबह होते होते दूध खराब हो जाता और मेरी बच्ची भूखी रह जाती। हद तब हुई जब एक दिन एक रिश्तेदार घर आये उन्होने बोला कि लड़की कितनी कमजोर है और शिवानी को तो डिलीवरी के बाद मोटा हो जाना चाहिये था खा पी के पर ये भी कितनी कमजोर हो रही है। जवाब दिया गया की अरे सारा दिन तो खाती रहती हैं दोनो माँ बेटी,और ये लड़की तो 1किलो दूध अकेली पी जाती है।मैं रसोई मे थी मेने सुना तो बोहोत बुरा लगा,इत्तेफाक से उस दिन मेरे पति भी घर पर ही थे उन्होने उस समय तो कुछ नही कहा पर शाम को मेहमानो के जाने के बाद काफी कहा सुनी हुई जो अब अक्सर होती रहती थी चूँकि मेरे पति कमाते तो थे ही इसलिये इन्होने निर्णय लिया कि हम अपना दूध अलग लेंगे। 

अब मेने उसको दाल चावल खिलाना शुरु कर दिया था तो एक दिन सुनने को मिला कि कोई जरुरत नही है  हमारे यहाँ रोज़ चावल नही बनते इसको रोटी खानी सिखा। ऐसी जाने कितनी बाते हैं जो लिखने लगी तो रात होनी तय है। जब हम दोनो इस बारे में बातें करते तो वो यही कहतें कि मुझे उम्मीद नही थी इस सब की। पता नहीं ऐसा क्यूँ हो रहा है जबकि हमारे घर तो किसी बात कि किसी चीज की कमी भी नही है।

मेने एक ऐसे इन्सान को जो दूसरो को रुलाने की क्षमता रखता हो, एक कर्मठ वकील, मजबूत पति पर एक परवाह करने वाले पिता के तौर पर टूटते हुए कई बार देखा। हमारे साथ हो रही ज्यादतियों का पछतावा उन्हे आज भी है। मैं 3 साल 8महीने वहाँ रही और मेरी बेटी पूरे 2साल।फिर एक दिन अचानक हमने या यूँ कहूँ कि मैंने तो ज्यादा सही होगा, घर छोडने की हिम्मत कर ही दी। उस दिन तो हद ही हो गई पानी सर से ऊपर चला गया और फिर में निकल गई अपनी बेटी को लेकर उसके उज्ज्वल भविष्य के लिये और एक नये जीवन की शुरुआत की नई जगह जाकर।इस सबमें पति ने मेरा पूरा साथ दिया।हमने सब से बात चीत बन्द कर दी, बस अपना कर्म अपनी मेहनत करते रहे,मेरे पति अपनी तैयारी भी करते रहे साथ साथ वकालत भी ईशू इस बीच प्ले ग्रुप मे डाल दी गई।हाँ मेरी बेटी ने 2साल 6महीने की उम्र से ही प्ले जोइन कर लिया था बेटा मेरा लेट है हर बात में😫।हम इतना ज्यादा मानसिक टॉर्चर हो चुके थे इन सबसे निकलने मे ही सालों लग गये। अब वो काला अध्याय मेरे जीवन का समाप्त हो गया मेरी सास के साथ।पर अन्त समय मैने उन्हे माफ़ कर दिया शायद इसीलिये उन्हें कैंसर होने के बावजूद प्राण त्यागने मे ज्यादा परेशानी नही हुई।ससुर जी हमारे साथ ही रहते हैं और मैं चाहती भी नही कि वो कही और जायें भी, उनका साथ अच्छा लगता है बिल्कुल मेरे पापा की तरह।मैने अनकहे उन्हे भी माफ कर दिया है और ये भी मान लिया है कि वो सब नही होता तो मेरे पति की मेहनत जूनून नही बनती और हम यहाँ नही होते।

"जख्म कभी भरते नही है बस वो छुप जाते हैं कुछ और जख्म दर्द बनकर उनसे बड़े हो जाते हैं।"

अब मे अपनी बेटी के साथ खड़ी हूँ हमेशा उसकी ढाल बनकर।

प्रताड़ना कई तरह की होती है,पर सबको शारीरिक ही नज़र आती है, मानसिक प्रताड़ना लेकर आप पुलिस के पास नही जा सकते,कोर्ट नही जा सकते सब यही पूछेंगे कि चोट कहाँ लगी है मैडिकल लेकर आओ। आपको पता है आज भी कई आदिवासी इलाकों में जिस पेड़ को गिराना होता है वहाँ लोग कुल्हाडी का उपयोग नही करते बल्कि उस पेड़ को कोसना शुरू कर देते हैं,गालियां देते है, पेड़ कुछ दिन मे सूख कर खुद ही गिर जाता है। कारण है जीने की इच्छा खत्म हो जाना, आत्म सम्मान खत्म हो जाना। मेरे साथ भी यही हो रहा था एक-दो बार तो मैं इतनी परेशान हो गई रोज़ के तानो से कि मुझे आत्म हत्या तक का ख्याल आया फिर ईशू की तरफ देख कर हिम्मत की, कि नही दिन बदलेंगे बेटा जरूर बदलेंगे।और ऐसा हुआ भी।😁

अब आपसे विदा लेती हूँ जल्दी ही मिलूंगी नये ब्लॉग के साथ नई कहानी के साथ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुछ जरूरी बातें- educational

Meri beti ne jo mujhe sikhaya- shivani deshwal

Shadi Ek Pavitra Bandhan Hai(Bhag -1)- shadi ke mayne