आगे बढ़ना जरुरी है पर अपनो के साथ
कितनी ही बार हम सफलता के पीछे भाग भागकर इतने असफल हो जाते हैं कि हमें खुद पता नही चलता की क्या पाने के लिए घर से निकले थे और क्या क्या खोकर लौटें हैं। ऐसा होता है और सच भी है। आगे बढ़ना कई बार हमारी मजबूरी से ज्यादा जरुरत बन जाता है और हम सफलता के पीछे भागते रहते हैं बिना पीछे मुड़कर देखे हुए या ये सोचते हुए कि कोई बोहोत अपना कोई खास मित्र कहीं चाय की दुकान पर खड़ा आज भी मेरा इंतज़ार कर रहा होगा और मुझे घर जाने से पहले उससे मिलकर उसके साथ मन ना होते हुए भी एक ग्लास चाय पीकर तो जाना ही है। सफल होने की दौड़ में जिस तरह से असफलताएँ पीछे छूट जाती है ठीक इसी प्रकार और भी बोहोत कुछ पीछे छूट जाता है। नये साथी मिलते हैं तो पुराने दोस्त छूट जाते हैं, नयी गाड़ी मिलती है तो पुरानी जान से भी ज्यादा जिसकी रक्षा करते थे, जिस पर गर्लफ्रेंड को बिठाकर शान से घूमते थे वो बाईक कहिं पीछे बोहोत पीछे छूट जाती है। बाॅस मिलते हैं तो माँ बाप पीछे छूट जाते हैं। हमारी वो सुकून की नींद जो स्कूल जाने से पहले आती थी या ...