पर छुप के इस दिल में तन्हाई पलती है- शिवानी देशवाल



 नमस्कार दोस्तों 

 जैसे कि आप सब आज का शीर्षक पहचान ही चुके होंगे की ये गाना नमस्ते लंदन फिल्म का है,गाना और फिल्म दोनो ही मेरे पसंदीदा हैं। पसंद तो हमेशा से ही था पर कभी तह तक नही गयी थी,मेरा भाई अक्सर ये गाना सुनता था तब मेने उससे पूछा था कि तू रोज एक ही गाना कैसे सुन लेता है,उसनेमुझसे कहा ये सच्चाई है दीदी हमारे जीवन की,सुना तो तुमने भी होगा पर आज अपने कानो से नही आत्मा से सुनो और वाकई मुझे उस दिन एहसास हुआ कि जिन्दगी की कितनी बड़ी हकीकत छुपी है इसके बोलों के पीछे। वाकई उस दिन से मेरा नज़रिया बदल गया हर चीज़ के प्रति। 

खुद से पूछिये की क्या ये सच नही है,क्या भीड़ केपीछे अकेलापन नही है, कुछ लोग तो भीड़ में भी अकेले हैं।कभी कभी ऐसा नही लगता कि आज कुछ देर अकेले बैठे और खुद से बाते करे,खुद से पूछे कि कैसी हो,बोहोत दिन हो गये खुद के साथ चाय नही पी अपनी कोई प्रिय किताब पढ़ते हुए,खुद की अलमारी नही देखी जिसमे कभी कॉलेज के दिनो मे डायरी छुपा के रखते थे वो डायरी जिसमें जाने कितनी कितनी ही खट्टी मीठी यादें और बाते संजो के रखी हैं उन दिनो की।स्कूल की फोटो एलबम देखें और याद करे कि ये फोटो कब कि है, इसमे मेरे साथ कौन सी सहेली है जो जाने अब कहाँ होगी।हम सब कैसे खाते थे साथ में छीना झपटी करके, कॉलेज बंक करके फिल्म देखने जाते थे। सब आस पास ही रहते है फिर भी कभी अकेले रहने को मन करता है केवल अपनी यादों के साथ।

सभी के जीवन में अकेलेपन के मायने अलग-अलग हो सकते हैं, जरूरी तो नही की अकेले होना किसी की यादों मे होना हो या किसी के बिना, बल्कि मुझे तो लगता है खुद के साथ होना भी हो सकता है, मायने रखता है कि हम क्या सोचते है।

अक्सर सभी आस पास होते हैं फिर खुद मे कुछ महसूस होता है कोई कमी जो अन्दर तो रहती है पर बाहर निकल कर नही आ पाती। और फिर उस छुपी हुई चीज को ढूंढने ही तो हम शहर या अपने आस पास की भीड़ से दूर कही शांत जगह छुट्टी मनाने जाते हैं। हमे लगता है कि हम सबके साथ छुट्टी मनाने आये है पर नही हकीकत ये नही है हकीकत ये है कि हम अपने अन्दर से उठ रही उस आवाज़ को ढूंढने जाते हैं जो भीड़ में कहीं दब जाती है या खो जाती है।

अब मेरे लिये इस गाने के मायने भी बदल गये हैं और कभी ना धुंधली होने वालीयादें भी। इस गाने को आप भी सुनिए पर कुछ नयें एहसासों के साथ- अपने आप के साथ अकेले।

         मैं जहाँ रहूँ, मैं कहीं भी हू, तेरी याद साथ है 

         किसी से कहूँ के नही कहूँ, ये जो दिल की बात है ।

         कहने को साथ अपने इक दुनिया चलती है

         पर छुपके इस दिल में तन्हाई पतली है 

         तेरी याद साथ है। तेरी याद साथ है ।

         कहीं तो दिल में यादों की एक सहेली गढ़ जाती है।

         कहीं हर एक तस्वीर बोहोत ही धुंधली पड़ जाती है 

         कोई नई दुनिया के नये रंगों में खुश रहता है

         कोई सब कुछ पा के भी ये मन ही मन कहता है।

         कहने को साथ अपने इक दुनिया चलती है,

         पर छुपके इस दिल में तन्हाई पलती है।

         तेरी याद साथ है, तेरी याद साथ है।


    

शिवानी देशवाल 

Email id: Shivicoolgirl@gmail.com 


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