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अक्टूबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कुछ बाते अनकहीं सी- Shivani Deshwal

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 मैने कितनी ही बार अपनी जिन्दगी मे पीछे मुड़कर देखने की कोशिश की है आज यहाँ आने के बाद भी। चूँकि आप अपने अतीत अपने पास्ट को पलटकर नही देखेंगे तो कभी अन्दाजा ही नही लगा पायेंगे कि हमने खोया क्या है और पाया क्या है? तो जब मे खुद को देखती हूँ आज से दस साल,बीस साल या तीस साल पीछे पलटकर तो काफी कुछ कहा अनकहा है,कई पुरानी यादें हैं जो कुछ पीछे छूट गई। बुरे पल भी रहें हैं अच्छे भी रहें हैं।         जैसे शादी के बाद जिन्दगी अलग सिरे से चली और शादी से पहले काफी अलग सिरे से थी। पहले आप मम्मी पापा के साथ रहते हैं उनकी बात मानते है उनकी बतायी बाते उनके विचार सुनते हैं और आप आगे बढ़ते रहते हैं सब सीखते हुए। कब बचपन निकल जाता है आपको पता भी नही चलता और फिर भी आप आगे बढ़ते रहते हैं नई चीजें सीखते हुए। सब अच्छा ही चल रहा होता है क्युकी आप अपना दिमाग इस्तेमाल नही करते पर जैसे ही आप अपनी चारदिवारी अपने घर से बाहर निकलते हैं आप काफी कुछ नया सोचने लगते हैं।सीखने लगते हैं। या यूँ कहिये की जिन्दगी सिखा ही देती है।        सीखना हमारे जीन मे है, हमारे खून में है यहाँ त...

बातचीत ही दूरियाँ मिटाने का आसान रस्ता है- शिवानी देशवाल

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 Namaskar dosto Meine aksar gaur kiya hai ki hmari roj Kitni hi baate ankahi reh jati hai. Hum kisi ko btana chahte hai ki hum uske bare mei kya sochte hai ya hum usse kitna pyar karte hai ya hum usse kyu naraz hai par keh nhi pate. Reason? Reason ye hai ki hum jo kehna chahte hai wo samne wala sunne ko bhi to tayyar ho. Rishton ko bnana to asan hota hai par unko maintain karna bohot mushkil hai. Samne wale ko apni feelings btana kai baar rishton par bhari pad jata hai aur tajjub to tab hota hai jab apke apne mata pita ya bhai behen hi kai baar apko samajh nhi pate jo ki humse mann se bhi jude hote hai aur blood se bhi. Aur hmesha se hi hmare sath rahe hai. Jab apno ke sath hi aisi situations aa jati hain to bahar ke rishton ko to waise hi badnam kiya hua hai duniya ne. Warna asliyat to apko aaina apne hi dikha dete hain.          Mera manna hai ki jis tarah ghar bnane mei efforts lgte hai waise hi rishton ko bnane mei bhi lgne chahiye aur wo bhi dono taraf...

कुछ जरूरी बातें- educational

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 Namaskar Dosto  Kai din baad kuch likhne beithi hu aj yup you r right i was little busy. Ek baat hai busy hona achha hai kyuki apka dhyan faltu ki negative baaton ki taraf nhi jata hai, in fact khush rehti hu aur sabse badi baat man halka rehta hai. Ab to jo bhi vichar din bhar se man mei aati hu sabhi ko kagaj par uker deti hu. Well ek achhi baat ye hau ki mei apni ek book bhi likh rhi hu, shuruat ho gyi hai roj kuch na likh hi deti hu. Time lag sakta hai thoda jyada. Umeed karti hu book apko achhi lgegi kyuki ye mere bhai ke bare mei hai. Ya keh sakte hai uski autobiography hai jo uske jane ke baad mei likh rhi hu. Wk aur book ayegi jisme uski poems, writing ka collection lekar aaungi. Festivals hai to busy hona to banta hai aur wo bhi sasural mei. Ajkal naye naye logo se milna hota hai aur achha lgta hai, mei khush rehti hu, khushi se apne sare kaam karti hu aur koshish karti hu ki mere aas paas ka mahol bhi khush gawar bna rahe. Meine kitni baar feel kiya hai khush hone i...

सूरज से सीखें रोज़ आगे बढना- Social

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 Namaskar Dosto सूरज रोज सुबह निकलता है और शाम को छिप जाता है।ये उसका रोज का नियम है। सर्दी हो गर्मी हो या बरसात यहाँ तक की गृहण के समय भी जो की हमारे पुराणो के अनुसार एक जटिल प्रक्रिया है,पर फिर भी ये उसका रोज़ का रूटीन है। प्रकृति द्वारा निर्धारित।हाँ बस उत्तरायण व दक्षिणायन् हो जाता है। 14 जनवरी से 20 जून तक सूर्य उततरायण होते है इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है।जबकि दक्षिणायन् 21 जून से 13 जनवरी तक माना जाता है और कहते हैं कि ये देवताओं की रात होती है। कितना खूबसुरत है ये रूटीन,अगर आपने ध्यान दिया होगा तो सुबह जब सूर्य निकलता है तो लालिमा लिये होता है और जब छिपता है तब भी लालिमा लिये होता है।जबकि दिन भर मे काई रंग बदलता है जैसे जैसे गर्मी बढती है रंग भी बढ़ते चले जाते हैं। बरसात के समय कितने भी घने बादल हौ आसमान मे कितनी भी तेज़ बरसात होती है पर हल्के से बादल हटते ही सूरज साफ देखा जा सकता है।ऐसे ही सर्दियाँ भी होती हैं तो घने कोहरे के छट जाने पर भी सूर्य देखा जा सकता है । कितना कर्मठ है कभी थकता नहीं है और रोज़ हमे सिखाता है कुछ नया।         गृहण भी साल...

Dosti- personel

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Nmaskar Dosto Kai baar aisa hota hai ki man bohot kuch kehne ka karta hai kisi se kisi apne se,ya kisi dost se. Par koi sune bhi to hmari isliye likh lena sabse better idea lgta hai. Par man kehna kya chahta hai. Pehle aisa kai baar hua tha ki mei aksar ignore kar deti thi par ab aisa nhi karti hu.  Sunti hu aur samajhne ki koshish bhi karti hu.                               Mei emotionally kafi weak hu. Logon se Jaldi jud jati hu khaskar kuch logon se to kafi jyada aur koshish karti hu kitna kuch karne ki unko kaise bhi karke khush rakhne ki. Par i always get hurt. Reason kuch bhi ho sakta hai , par aisa hi hai. Par iske bawjood kuch dost hain meri zindagi mei jo mujhe hmesha support karte hai chahe kuch bhi ho jaye kaisi bhi situation kyu na ho. May be mei bohot din tak unse contact nhi kar pati par wo fir mujhe utna hi pyar karte hai utna hi mante hai aur jab bhi baat karti hu to koi shikwa shikayat nhi b...

जन्म का बंधन- शिवानी देशवाल

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 भाग 2 से आगे..... एक अन्य कारण है झूट बोलकर शादी करना। कितनी ही जगह मैंने देखा है लड़के की या लड़कियों की शादी झूट बोलकर या उनके बारे में बढ़ चढ़कर बताकर कर दी जाती है। और जब असलियत दूर दूर तक भी सच होती नही दिखती तो लड़ाई झगडे  शुरू हो जाते हैं जो की आगे चलकर अलगाव की स्थति पैदा हो जाती हैं , जैसे - लड़के के कई काम को लेकर, उसकी तनख्वाह ज्यादा बताना, या घर से बाहर रहकर नौकरी करना बताना, या उसके तौर तरीके छुपा लेना, जमीन जायदाद को बढ़ा चढ़ाकर बताना। ऐसा भी कमाल ही है ना कि बोहोत से घरो मे शादी के महिने भर बाद ही लडक़ा ये कहकर घर पर बैठ जाता है कि अब मैं बाहर जाके काम नही करूंगा क्युकि मेरा मन नही लगता या कि मेरा काम ठप्प हो गया है। ऐसा हो सकता है क्या? नही कोरोना जैसी स्थति को छोड़कर। कयूकि वो बाहर कभी गया ही नही। केवल शादी करने के लिए झूठ बोले गये थे। लड़कियों के घर के काम काज करने को लेकर छुपाना, उसकी तनख्वाह या नौकरी की बात को लेकर झूट बोलना या कई बार दोनो के ही विवाह पूर्व अन्य जगह संबंधों की बात को छुपा लेना जो की बाद तक भी चलते रहते है और फिर विवाह टूटने का असली कारण बनते हैं।...

चल जा आजाद कर मुझे उन कसमों की कैद से- Dard Shayari

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चल जा मुझे आजाद कर उन कसमों की कैद से, जो मैंने भुलाई नहीं और तूने निभाई नही। Chal Ja Azad Kar Mujhe Un Kasmo Ki Qaid Se Jo Meine Bhulayi Nahi Aur Tune Nibhayi Nahi

कितनी आरजू थी तुमसे मिलने की- Meri Shayari Meri Kavita

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कितनी आरजू थीं तुमसे मिलने की बातें करने की मगर होश ही कहाँ रहा तुम्हे देखने के बाद Kitni Aarzoo Thi Tumse Milkar Baatein Karne Ki Hosh Hi Kahan Rha Tumhe Dekhne Ke Baad

तेरी खनकती पायल के घुंघरू इस तरह बोल उठे - Meri shayari meri Kavita

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 तेरी खनकती पायल के घुंघरू इस तरह बोल उठे  मेरी धड़कनो की आवाज़ को अनसुना कर गये।  Teri Khanakti Payal Ke Ghunghru Is Tarah Bol Uthe  Meri Dhadkano Ki Awaz Ko Anusuna Kar Gaye. 

अगर मुझसे पूछोगे -meri shayari meri kavita

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अगर मुझसे पूछोगे तजुर्बा कैसा रहा जिंदगी का  तो बस यही कहूँगी सावन का महीना है और धूप छाँव का खेल है  Agar Mujhse Puchoge Tazurba Kaisa Rha Zinadagi Ka To Bas Yahi kahungi Sawan Ka Mahina aur Dhoop Chhav Ka Khel Hai.

मेरे दिल ने कुछ हसरतें क्या पाली तुमसे -Dard Shayari

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मेरे दिल ने कुछ हसरतें क्या पाली तुमसे  हम तो दुआओं में भी बदनाम हो गए।  Mere Dil Ne Kuch Hasratein Kya Paali Tumse  Hum To Duaon Mei Bhi Badnam Ho Gaye   

कितनी कोशिश की थी छिपाने की इन आँखों की नमी - Dard Shayari

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कितनी कोशिश की थी छिपाने की इन आँखों की नमी  उन्होने हाथ पकड़ा और हम रोते चले गए  Kitni Koshish Ki Thi Chipane Ki Ankho Ki Nami Unhone Hath Pakda Aur Hum Rote hi Chale Gaye

कितना खुदगर्ज़ रहा है तू मेरी जान हमेशा से ही- Dard Shayari

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कितना खुदगर्ज़ रहा है तू मेरी जान हमेशा से ही  जाते जाते मेरी मुस्कान भी साथ ले गया  Kitna Khudgarz Rha Hai Tu Meri Jaan Hamesha Se Hi Jate Jate Meri Muskaan Bhi Sath Le Gaya

मैंने कब चाहा कि तू मेरा ना हो - Meri Shayari

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मैंने कब चाहा कि तू मेरा ना हो  पर तेरी चाहतें भी तो मायने रखती होंगी।   Meine Kab Chaha Ki Tu Mera Na Ho Par Teri Chahtein Bhi To Mayne Rakhti Hongi

मुझे तो मोहब्बत मे बस रूसवाईयाॅ हाथ लगी - Dard Shayari

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मुझे तो मोहब्बत मे बस रूसवाईयाॅ हाथ लगी  चाहतों का खजाना तो कोई और ले गया  Mujhe To Mohabbat Mei Bas Ruswaiyan Hath Lagi Chahton Ka Khazana To Koi Aur Le Gaya 

मेरे दिलों जान पर तेरा ही बसेरा है अब- Dard Shayari

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मेरे दिलों जान पर तेरा ही बसेरा है अब क्या इतना काफी नही किसी घर मे रहने के लिए   Mere Dilo Jaan Par Tera hi Basera Hai Ab Kya Itna Kafi Nahi Kisi Ghar Mei Rehne Ke Liye

Shadi Ek Pavitra Bandhan Hai(Bhag -2)- shadi ke mayne

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 नमस्कार दोस्तों                    इस ब्लॉग के पहले भाग में हमने चर्चा की थी की आजकल इतने परिवार क्यों टूट रहे है? दहेज़, मारपीट शारीरिक शोषण के अलावा( चूँकि मुझे लगता है अलग होने के अलावा इन कारणों का कोई विकल्प होना भी नहीं चाहिए बल्कि पुलिस में रिपोर्ट लिखवाकर सजा दिलानी चाहिए ऐसे लोगो को तो) आज गौर करते है अन्य  कारणों, गलती और ज़िम्मेदारी के बारे में - कारण -   दोस्तों आज के समय में घर टूटने के कई कारण हैं।अब लड़कियाँ पहले से ज्यादा समझदार हो गयी है, जिन अत्याचारों को वो पहले ज़माने में चुपचाप घर में रहकर बिना किसी को बताये सहती रहती थी की कहीं किसी को पता चल गया तो उसी की गलती निकालेंगे, लोग क्या कहेंगे , कहीं मम्मी पापा तक बात पोहोच गयी तो क्या होगा, पडोसी क्या सोचेंगे? तो लड़कियां बंद घरों में चुपचाप बिना किसी को बताये सालोसाल किसी भी तरह के जुल्म सहती रहती थी। यहाँ तक की बुढ़ापे तक भी वो किसी को बता ही नहीं पाती थी, और फिर ये जुल्म आगे तक भी चलते रहते थे जैसे कि उनकी बहू पर भी जुल्म होते थे कारण था की बेटे ने भी वह सब ...

Shadi Ek Pavitra Bandhan Hai(Bhag -1)- shadi ke mayne

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नमस्कार दोस्तों                                                     कुछ दिन पहले हमारे एक रिश्तेदार का फ़ोन आया उनका अपनी पुत्रवधु से कुछ विवाद चल रहा है जो कि अपने मायके में रह रही है पिछले छह महीने से उसके 2 बच्चे भी हैं, उनके हिसाब से हमने उसके परिवार से बात करने की कोशिश की है पर वो लड़की हर बार ससुराल में झगड़ा करती है और अपने मायके में जाकर बैठ जाती है और उसके माता पिता अपनी बेटी का गलत में भी साथ देते है।और हम लोग जब भी बात करने की कोशिश करते है तो उसके माता पिता हमसे गलत तरीके से बात करते हैं,७ साल शादी को हो गए। और पहले दिन से ही कुछ न कुछ विवाद चल रहा है, हर बार तो मेरा बेटा उसको मनाकर ले आता था 1 -२ महीने में पर इस बार बेटे ने भी मना कर दिया उसको लाने से। तो विवाद लम्बा खिंच गया है अब हम क्या करें? ये इनका कहना है मतलब एकतरफा बात पता है हमें अभी। और फ़िर अपनी ग़लती तो क़ोई बताता ही नही है।                 ...

माता देती है नारी को शक्ति- navratre ki jankari

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कल विजयदशमी है आज शारदीय नवरात्र का आखिर दिन यानि की नवमी आज माता वापस चली जाएँगी। हमारे यहाँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांझी लगाई जाती है पितृपक्ष अमावस्या की शाम को या पहले नवरात्र में। सांझी की अगर बात करूँ तो ये मिटटी की बनी छोटी सी मूर्ति रूप होती हैं जिनको स्थापित नहीं किया जाता बल्कि गाय के गोबर की सहायता से दिवार पर लगाया जाता है इनके साथ इनका एक भाई भी होता है उसको भी थोड़ा नीचे करके लगाया जाता है और साथ में नवगृह भी लगाए जाते है। इनको रोज नियम से पूजा जाता है सुबह दोपहर और शाम को भोग लगाया जाता है। जो भी शुद्ध सात्विक भोजन अपने घर में बनाया होगा साथ में घी में बूरा मिलकर रोज भोग जरूर लगते है। घी बूरा का भोग लगाने का एक खास मतलब है दरअसल हमारे यहाँ पुराने ज़माने में जब भी कोई मेहमान घर आता था तो उन्हें खाने के साथ घी बूरा जरूर खिलाते थे ऐसा मन जाता रहा है की इसका मतलब होता है की रिश्तो में मिठास बनी रहे और इसी तरह हमारे यहाँ मेहमान आते रहे। इसे बड़ी खास मेहमान नवाज़ी माना जाता था।                             ...

Transfer se darna kaisa- Enjoy Your Transfers

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  ३१ मार्च  को रात को ट्रांसफर की लिस्ट आई। कई दिन के इंतज़ार के बाद के बाद आखिरकार अच्छा लगा, ख़ुशी हुई, ख़ुशी बदलाव की खुशी। हाँ क्युकी में बदलाव चाह ही रही थी अपनी पुरानी जगह से, मुझे कुछ परेशानी हो रही थी मानसिक तौर पर। या ये भी कह सकते है कि मुझे इस बदलाव की आदत है, में ज्यादा दिन एक जगह नहीं रह सकती ,थोड़ा अजीब है न? पर है क्या करे।मुझे आदत है इसकी।                                 जब में छोटी थी सातवीं क्लास तक तो मै सिम्भावली में पढ़ी फिर 8 वी क्लास बहराइच से की ,9 वी और 10 वी चंदौसी जिला मुरादाबाद से किया बल्कि 10 वी भी बीच में ही थी कि हम मीरापुर आ गए क्युकी पापा वह से छोड़कर यहाँ आ गए थे। टिकौला चीनी मिल्स में तो मैंने वापस जाकर अपनी सहेली के घर रहकर पेपर दिए थे इस तरह से मैंने अपना पहला बोर्ड दिया, फिर 11th और 12th जानसठ जिला मुज्जफरनगर से किया क्युकी मीरापुर में लड़कियों के लिए साइंस के सब्जेक्ट्स नहीं थे किसी भी स्कूल में तो मुझे जानसठ एडमिशन लेना पड़ा क्युकी मेरे सब्जेक्ट्स फिजिक्स,केमिस्ट्री...

होवितजर तोप educational blog - शिवानी देशवाल

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पूर्वोत्तर सीमा पर हॉवित्जर तोप तैनात  चीन से जारी गतिरोध के बीच भारतीय सेना ने 1300 किलोमीटर लम्बी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल ए सी LAC) पर अरुणाचल प्रदेश में एम् -777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप तैनात की है, सबसे ख़ास बात ये है की ये इतनी हलकी है की जरुरत पड़ने पर इन्हे चिनूक हेलीकॉप्टर या टृक से कही भी लेकर जाया जा सकता है, बोफ़ोर्स टॉप  11 टन वज़नी होती थी इसलिए उन्हें ऊँचे पहाड़ों पर ले जाने में कुछ परेशानियाँ होती थी (हालाँकि कारगिल युद्ध के समय इन्होने युद्ध जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी इसलिए उसकी महत्ता  को काम करके नहीं आँका जा सकता), परन्तु अब भारत को भी अपग्रेडेड और एडवांस टेक्नोलॉजी से निर्मित्त टाइटेनियम से बनी हॉवित्जर तोप 4.4 टन की है, लेह, लद्दाख  और अरुणाचल प्रदेश के 16 हज़ार फीट से ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में भी इन्हे तैनात किया जा सकता है,  खासियत    अमेरिका को 2016 में 145 हॉवित्जर तोपों का ऑर्डर दिया गया था, जिसमे से 125 अब तक मिल चुकी  2018 में इन्हे भारतीय सेना में शामिल किया गया  पोकरण फ़ील्ड फायरिंग रेंज में परीक्षण सफल...

Bharat mei 5-G Spectrum ki shuruat- educational

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  दोस्तों आज 1 अक्टूबर 2022  को हमारे देश मे पृधानमंतृी नरेंदृ मोदी जी द्वारा दिल्ली के पृगति मैदान मे इंडिया मोबाइल कॉंग्रेस (IMC 2022) का उदघाटन किया  व 5जी सर्विस की शुरूआत की।इसके जरिये देश को हाई स्पीड इंटरनेट मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।  यह सेवा शुरुआत मे देश के कुछ चुनिंदा शहरों में उपलब्ध होगी फिर कर्मांक से पूरे देश में लागू होगी, हाल ही में दूरसंचार स्पेक्ट्रम की नीलामी में 1.5 लाख करोड़ रुपये की बोली प्राप्त  हुई थी जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इसमे देश के दो दिग्गज नेटवर्क प्रोवाइडर सबसे आगे रहे।मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने 87,946.93 करोड़ की बोली लगाकर सभी स्पेक्ट्रम का लगभग आधा हिस्सा हासिल कर लिया।सुनील भारती मित्तल की कंपनी भारती एयरटेल 43,039.63 करोड़ की बोली लगाकर दूसरे नंबर पर बनी रही।वोडाफोन व आइडिया ने 18,786.25  करोड़ मे ये स्पेक्ट्रम खरीदा है।  किन शहरों को मिलेगा 5 जी दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलूरू,चंडीगढ़, चेन्नई, गांधी नगर, गुरूग्राम, हैदराबाद, कोलकाता, जामनगर, लखनऊ, व पुणे। इन 13 शहरों में 5जी की शुरुआत की गई...