कुछ बाते अनकहीं सी- Shivani Deshwal
मैने कितनी ही बार अपनी जिन्दगी मे पीछे मुड़कर देखने की कोशिश की है आज यहाँ आने के बाद भी। चूँकि आप अपने अतीत अपने पास्ट को पलटकर नही देखेंगे तो कभी अन्दाजा ही नही लगा पायेंगे कि हमने खोया क्या है और पाया क्या है? तो जब मे खुद को देखती हूँ आज से दस साल,बीस साल या तीस साल पीछे पलटकर तो काफी कुछ कहा अनकहा है,कई पुरानी यादें हैं जो कुछ पीछे छूट गई। बुरे पल भी रहें हैं अच्छे भी रहें हैं। जैसे शादी के बाद जिन्दगी अलग सिरे से चली और शादी से पहले काफी अलग सिरे से थी। पहले आप मम्मी पापा के साथ रहते हैं उनकी बात मानते है उनकी बतायी बाते उनके विचार सुनते हैं और आप आगे बढ़ते रहते हैं सब सीखते हुए। कब बचपन निकल जाता है आपको पता भी नही चलता और फिर भी आप आगे बढ़ते रहते हैं नई चीजें सीखते हुए। सब अच्छा ही चल रहा होता है क्युकी आप अपना दिमाग इस्तेमाल नही करते पर जैसे ही आप अपनी चारदिवारी अपने घर से बाहर निकलते हैं आप काफी कुछ नया सोचने लगते हैं।सीखने लगते हैं। या यूँ कहिये की जिन्दगी सिखा ही देती है। सीखना हमारे जीन मे है, हमारे खून में है यहाँ त...