हिंदी दिवस- हिंदी बोलना क्यो है जरूरी?- शिवानी देशवाल

 नमस्कार दोस्तों 




आज हिंदी दिवस है सबसे पहले हिंदी दिवस की आप सभी को बोहोत बोहोत बधाई। आप सोचेगे कि इसमे बधाई की क्या बात है ये तो हर साल आता है पर आपने शायद ध्यान नही दिया कि अंग्रेजी पढने वाले हमारे बच्चे अब कितना हिंदी बोलते हैं,और लिखने की बात तो आप छोड़ ही दो।

दोस्तों हिंदी दिवस हर वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है।वर्ष 1918 में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने हिंदी साहित्य सम्मलेन मे हिंदी को राजभाषा बनाने को कहा था, इसे गाँधी जी ने जन मानस की भाषा भी कहा था।

14 सितम्बर सन 1949 को यानी आजाद भारत की संविधान सभा में यह निर्णय लिया गया कि हिंदी संघ सरकार की अधिकारिक भाषा होगी।

हिंदी दिवस पर स्कूल व कार्यालयों में कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं जैसे -निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कविता लेखन,कवि सम्मेलन आदि। इसके द्वारा हमारा उद्देश्य रहता है कि हम अपनी भाषा के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त कर सके। वैसे देखा जाये तो अब हम पूर्णतया हिंदी के शब्दों का इस्तेमाल नही करते बल्कि उसमें अंग्रेजी के शब्द भी मिला देते हैं।कारण है कि जो सँस्कृति हमे हमारे पूर्वजों से विरासत मे मिली है वो हम आगे अपने बच्चों को नही दे पा रहे, क्युकी उनकी पढ़ाई लिखाई और बोलने का माध्यम अंग्रेजी मे है इसमे गलती उनकी नही है हमने ही उन्हे जरुरत से ज्यादा आगे बढ्ने की होड़ लगा दी है जिसमें बाकी सब पीछे छूटता जा रहा है ।अंग्रेजी हिंदुस्तान की दूसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है और विश्व में चौथे नंबर पर बोले जाने वाली भाषा है।

विदेश मे जब भी कोई हिन्दुस्तानी दूसरे हिन्दुस्तानी से मिलता है तो अपनी भावनाएँ प्रकट करने के लिये अपनी मात्रभाषा मे ही बात करता है।

14 सितंबर से हिंदी सप्ताह भी मनाया जाता है जिससे की हिंदी केवल एक दिन के लिए ही सिमट के ना रह जाये। इसमे एक हफ्ते तक कुछ ना कुछ कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं हिंदी केवल हमारी राष्ट्रभाषा या मातृ भाषा ही नही अपितु यह राष्ट्रिय अस्मिता और गौरव का प्रतीक है।

भाषा ही वो माध्यम होती है जिसके द्वारा हम अपनी भावनाएँ अपने मन की बात सहजता से दूसरों के सामने रख पाते हैं ।और मुझे गर्व है कि मेरा अपनी बात कहने और समझने का माध्यम हिंदी है।

                "हिंदी हैं हम वतन है हिंदोस्तां हमारा "



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