कूनो में चीते या कूनो के चीते- शिवानी देशवाल

 नमस्कार दोस्तों 


कूनो में चीते आयें हो मेहमान बनकर नामीबिया या अब कूनो के चीते हो गये हो दोनो ही परिस्थितियो मे ये बात ध्यान रखने योग्य है कि हम उनकी देखभाल कैसे करते हैं।

कल सारा दिन टीवी पर एक ही खबर प्रसारित होती रही कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने आठ चीते मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा।खबर अच्छी थी इसलिये देखने मे मज़ा भी आ रहा था कि चलो कुछ तो नया हुआ देश में राजनीति, भ्रष्टाचार, शोषण की खबरों के अलावा कुछ बचा ही नही था न्यूज़ चेनल्स के पास।

चीतों की अगर बात करे तो ये चीते बिल्ली की प्रजाति जिसे विडाल कहते हैं क अन्तर्गत आते हैं।ये चीते अपनी तेज़ रफ्तार और अदभुत  फुर्ती के लिये जाने जाते है। जानवरो पर हुए एक सर्वे के अनुसार ये धरती पर रहने वाले सबसे तेज़ जानवर होता है।आपको बताऊँ कि इसकी रफ्तार सुपर कार से भी तेज़ होती है ।ये एक अकेला विडाल वंशी है जिसके पंजे बन्द नही होते जिसकी वजह से इसकी पकड़ कमजोर होती है।शारीरिक बनावट की बात करे तो ये पतली कमर,पतली गर्दन, बड़ी बड़ी आँखो के साथ, सिर छोटा होता है। इसके मुह पर काले रंग के आँसू जैसे दिखने वाले निशान,आखों क कोनो से शुरु होकर नाक से नीचे मुँह तक आते हैं,जिससे सूर्य की तेज़ रौशनी में भी शिकार करने में मदद मिलती है ।

कूनो नेशनल पार्क के बारे मे बात करे तो इसकी स्थापना सन 1981को वन्य अभ्यारण्य के रूप में की गई थी, ये एक वन संरक्षित क्षेत्र है, जिसे वर्ष 2018 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था। ये 750 स्क्वायर किलो मीटर में फैला हुआ है। ये मध्य प्रदेश के श्योपुर और मुरैना जिलों तक फैला हुआ है।यहा अगले पाँच सालो में 50चीते लाने की योजना है।इसके बाद कूनो में चीतो का ब्रीडिंग सेन्टर बनाने की योजना है।इसका कूनो नाम कूनो नदी की वज़ह से पड़ा जो कि बिल्कुल बीच से बहती है।अब मध्य प्रदेश 562 बाघ, 3421तेंदुए और अब 8 चीते आने क बाद से चीता प्रदेश भी बन गया है। जो कि हम सबके लिये गर्व की बात है।

पर एक बात का जिक्र जरुर करना चाहूंगी की मुझे आजतक नही पता था कि हमारे देश में चीते हैं ही नहीं,मैं तो मुकुंदपुर के सफेद टाइगर देख कर सोचती थी यही होता है चीता।और मेरी तरह जाने कितने लोग इस बात से अनभिज्ञ होंगे, ना कभी पढ़ा ना सुना।कमाल की बात है ना कि देश को 1952में चीता विहीन घोषित कर दिया गया बिना कोई बचाने या संरक्षित करने की कोशिश किये बिना।

वो कहावत है ना "कभी नही से देर भली"।





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