संदेश

सितंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कुदरत एक अनमोल खजाना- Social sandesh

चित्र
आज सुबह 6.30 बजे जब मै बाहर गई अपने गार्डेन में तो मौसम बोहोत ही प्यारा लग रहा था,खुले आसमान की तरफ देखा तो कई महिनो बाद नीला रंग गजब ही लग रहा था। लगा मानो कुदरत महीनो से बारिश में नहाने के बाद निखर गई हो। बादल वापसी कर चुके हैं, जहा नही किये वहा से भी निकलने के लिये सामान बान्ध ही रहे होंगे।  ज्यादा अच्छा तब लगा जब टहलते हुए कुछ मोर पंख मिल गये। हाँ मोर बोहोत हैं यहाँ।कुदरत के कितने करीब होने का एहसास अलग ही होता है, आप कितने भी थके हुए हो सारी थकान पल में छू हो जती है। तरह-तरह की चिडियाँ आती हैं रोज दाना चुगने। दाना मुह मे लेती हैं फिर या तो पेड़ पर बैठ जाती हैं या उनमे से कुछ अपने घोसले मे अपने बच्चों को देकर फिर लौट आती हैं। उन्हे देख कर मन करता है काश की मैं भी चिडिया होती, पंख फैलाये दौड़ जती असमान मे ऊपर बोहोत ऊपर और चुरा लाती आसमान का नीला रंग जो दूर ही दूर से आकर्षित करता रहता है अपनी ओर। कितनी खूबसूरती का खजाना छिपा है यहाँ, असमान का हल्का नीला रंग, पेड़ पौधों का हरा और मन का अलग खुबसूरत रंग जो है पर दिखाई नही देता। छिपा है बस अन्दर मन के भीतर। बड़ा अच्छा लगता है जब मोर पेड़ो...

Anil Chauhan Ji ke Bare Mei Jankari- Jeevani

चित्र
दोस्तो जौसा की आप सब को ज्ञात हो ही गया होगा की लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान जी (रिटायर) भारत के दूसरे सी डी एस होंगे। इसकी घोषणा 22 सितम्बर 2022को की गई है। आइये जानते हैं कुछ मुख्य बातें ले. ज. अनिल चौहान जी के जीवन से जुड़ी हुई- ले. ज. अनिल चौहान का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले मे हुआ था। आपको बताते चले कि पहले सी डी एस जनरल विपिन रावत जी भी उतराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल जिले से ही ताल्लुक रखते थे, पिछ्ले साल दिसंबर माह मे उनकी हेलिकॉप्टर दुर्घटना मे पत्नी सहित मृत्यु हो गई थी।तब से ही सी डी एस का पद खाली था और उस पर कोई नियुक्ति नही की गई थी। ले. जनरल अनिल चौहान का जन्म उत्तराखंड के पौढी गढ़वाल जिले मे 18मई 1961 हुआ था। इनकी शुरुआती पढ़ाई कोलकाता के केंद्रीय विद्यालय से हुई। मात्र 20वर्ष की उम्र मे ही एन डी ए द्वारा भारतीय सैन्य एकेडेमी से ट्रेनिंग लेकर बतौर अधिकारी 11गोरखा राइफल्स मे कमीशन हुए। इनकी पत्नी का नाम अनुपमा चौहान है जो कि एक कलाकार हैं।इन्हे तिब्बती कला बोहोत पसंद है।व इनकी एक बेटी है जिसका नाम प्रज्ञा है। ले .जनरल अनिल चौहान जी को चीनी मामलों का विशेष जानकार माना जाता है...

Mera favourite festival- Shivani deshwal

चित्र
नमस्कार दोस्तों               आज सुबह ही मैने पतिदेव को याद दिलाया की करवा चौथ आ रही है इस बार क्या दिलाओगे तो उन्होने बोला कुच नही केवल मेरी तरफ देखा और अपना काम करने लगे।सोचा जाये तो इस खामोशी के कई अर्थ रहे होंगे,जैसे की तुमको जब देखो खर्चों की पड़ी रहती है या अभी 7वा वेतन आयोग तक लगायी नही है हाई कोर्ट,आदेश कब से हुआ रखा है,या फिर ये भी कि सुबह सुबह दिमाग का दही मत करो जाओ अपना भी काम करो और मुझे भी करने दो😁 पर मैं भी ठहरी शिवानी इसलिये बिना ज्यादा वक्त गँवाए मैंने अपने मतलब का अर्थ निकाल लिया कि अरे यार क्या बात करती हो सब तुम्हारा ही तो है जो चाहे ले लो😁😁                देखिए भई ये सच भी है कि आखिर है तो सब हमारा ही आखिर पति बेचारे खर्च ही कहाँ करते है? पर खर्च तो बिना बताये हम भी नही करते।अब देखिए हो चाहे जो भी पर शान्ति बड़ी है इस बात में। करवा चौथ मेरे पसंदीदा त्यौहारों में से एक है, मतलब वो भी कारण सही है कि भई खूब खर्च करवाते हैं उसके अलावा भी कई कारण हैं।कारण है उस दिन मुझमें एक अलग ही एनर्जी रह...

Bachpan ki yaadein - shivani deshwal

चित्र
 नमस्कार दोस्तो  सबलगढ़ में ज्यादातर महिलाएं साड़ी पहनती हैं, साड़ी ही उनका रोज का पहनावा है, जब भी मंदिर जाती हूँ तो कीर्तन होते होते रहते है मंदिर में, वह बोहोत सारी महिलाये कीर्तन करती है, अच्छा भी लगता है, हालाकि में वह जयादा देर रुक नहीं पाती, वापस आ जाती हूँ पर जाने अनजाने मन वही छोड़ आती हु, वही ढोलक की थाप, ताली बजाते हाथ घर वापस आने के बाद भी कानो में गूंजते रहते है, असली तीज त्योहर या संस्कृति छोटे शहरों में अभी भी जिन्दा है किसी न किसी रूप में, बड़े शहरों में तो बस दिखावा ही रह गया है।  में छोटी थी तो मम्मी को अक्सर सुन्दर सुन्दर साड़ी पहने हुए देखा करती थी।तब हम तीनो भाई बहन छोटे हुआ करते थे, मम्मी सुन्दर बोहोत लगती थी साड़ी पहने हुए, तब हम उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के सिम्भावली नाम के कस्बे में रहते थे, पापा वहाँ चीनी मिल में नौकरी करते थे (उ.पृ. में बोहोत बड़ी संख्या में चीनी मिले हैं) छोटी जगह थी , ज्यादातर सभी एक दूसरे को जानते थे, मंदिर जाना हो, किसी के घर ,हम तीनो भाई बहन वही पैदा हुए, बोहोत मज़ा आता था , सब लोग बोहोत प्यार करते थे, कही हमे कोई बाहर खेलते देख ल...

मेरी कविता - शिवानी देशवाल

चित्र
वो तेरा रूठना मनाना याद आता है,  वो तेरा मुस्कुराना याद आता है । यूँ तो और भी हैं,रिश्ते नाते नये पुराने, पर वो तेरा गले लगाना याद आता है। कितनी बाते हैं जो अनकही ही रह गयी, कितनी यादें हैं जो पास ही रह गयी, फिर वो वक़्त लौटा तो लाये कोई, दूर से देखकर तेरा दौड़ के आना याद आता है। वो तेरा रोना मुस्कुराना याद आता है। यूँ तो तेरे गम से पथरा गई है आँखे, वो तेरी कभी ना खत्म होने वाली बाते, थाली बजाकर जोर जोर से गाने गाना याद आता है, वो तेरा रूठना मेरा मनाना याद आता है। कभी सोचा था किसने तन्हा रह जाऊंगी मैं, चाहकर भी तुझसे मिल ना पाऊँगी मैं, रातो को छुपते छुपाते मैगी बनाकर खिलाना याद आता है। फिर तेरा रूठना मेरा मनाना याद आता है। कितना दिलदार था तू यार, बड़ा दिल ले गया, उम्र भर के रिश्ते मे सब कुछ दे गया, देख मुड़ के तो सही कहाँ छोड़ गया रे तू, वापस आने के सब रास्ते मोड़ गया रे तू, कितना खुलकर तेरा चहचहाना याद आता है। और फिर एक बार वो तेरा रूठना मेरा मनाना याद आता है। Dedicated to my brother shaheed lt. AKASH CHAUDHARY Shivani deshwal Shishu9.blogspot.com Shivi chaudhary vlogger

kitty party (किटी पार्टी)- shivani deshwal

चित्र
नमस्कार दोस्तों  जैसा की आप सब नाम से ही समझ गए होंगे किटी पार्टी आज का शीर्षक है, जिसके बारे में हम बात करने वाले हैं, जब मैंने इंटरनेट छाना, गूगल सर्च किया तो मुझें कुछ खास जानकारी हाथ नहीं आयी और जो जानकारी मिली वो कुछ ख़ास नहीं लगी।क्युकि शायद लोग अपनी बात समझा नहीं पाए चूकि मेरी वास्तविकता और खासियत तो आप सब जानते ही हैं की में अपने ब्लॉग अपने ऊपर ही लिखती हूँ या उन्ही विषयो पर लिखती हूँ जो में खुद फॉलो करती हूँ। तो मुझे आईडिया आया कि मैंने भी किटी पार्टी ओर्गनाइज की है, और अटेंड भी तो क्यों ना कुछ अपने शब्दों में सरल भाषा में ही बताया जाये।                         किटी को लोग अक्सर बड़े लोगो के शौक़, बिना काम काज वाली औरतों के चोंचले के रूप में देखतें हैं। या फिर रेव पार्टीज़, महंगे होटल, विज्ञापन करने के तरीक़े या दिखावा करने की जग़ह के रूप में भी देखते है। बोहोत लोगो को लगता है की बोहोत सारे पैसे, महंगे शौक, को पालने वाले या दिखावा करने वाले लोग ही किटी कर सकते है। धीरे धीरे किटी समाज में एक स्टेटस सिंबल बन गयी है, ऐसा ह...

वो तेरा आना, वो तेरा जाना - dard shayari, dard kavita

चित्र
नमस्कार दोस्तों   कैसे है आप सब? दोस्तों आज आपके लिए एक छोटी सी कविता (POEM ) लायी हूँ , उम्मीद करती हूँ आपको आपको पसंद आएगी, मुझे हमेशा की तरह यूँ ही प्यार देते रहिये                                  वो तेरा आना, वो तेरा जाना                                 तेरा बार बार बहाने से मुझसे मिलने आना                                 बनाकर कोई नया बहाना,                                जाने क्यों पलछिन याद आते हैं                                 हाँ , मुझे वो पल, वो दिन याद आते हैं,                           ...

Meri Shayari Meri Kavita- dard shayari

चित्र
नमस्कार दोस्तों                      आज मैं आपके लिए एक नयी शायरी लायी हूँ , उम्मीद के मुताबिक आपको ज़रूर पसंद आएगी, दोस्तों इसे सुने और अपने प्यार दें जैसे की आप अभी तक देते आये हैं, दोस्तों मै आज से आपके लिए शॉर्ट्स वीडियोस लायी हूँ जिसका नाम है दोहे, चौपाई , श्लोक्य आदि की जानकारी शेयर करुँगी उसके हिंदी मतलब के साथ  मुझे फॉलो करे shishu.blogspot.com  पर  shivani deshwal क नाम सेfacebook  पेज पर फॉलो   shivicoolgirl@gmail.com  पर मुझे मेल करें 

योगा- करने से ही होगा- social sandesh

चित्र
 नमस्कार दोस्तों  बात है 2008-2009 के आस पास की। मै तब जॉब करती थी तो समय मिलते ही योग जरूर करती थी इसका मुझे फायदा भी मिलता, मेरा मन, शरीर और ध्यान तीनो चुस्त दुरुस्त और खुश रहते। शादी के बाद समय और मन दोनो ही तनाव ग्रस्त रहे तो ज्यादा ध्यान उस तरफ गया ही नही हा दोनो गर्भावस्था के दौरान मे अपने कमरे मे योग कर ही लेती थी, फिर धीरे-धीरे मैं खुद से ही अलग हो गई और आलस ने घेर लिया।अब पिछ्ले एक साल से लगातार योग शुरु किया तो वाकई फर्क देखने को मिला एक बार फिर पहले जैसी स्फूर्ति आ गई और ज्यादातर काम घर के हो या बाहर के ज्यादा एनर्जी के साथ।  योग या योगा होता क्या है? दोस्तों योग संस्कृत शब्द 'यज धातु' से निकला है जिसका मतलब होता है 'अपने मन से मिलन'। अर्थात योग मे इतनी शक्ति होती है कि ये आपको अमरत्व की प्राप्ति करवा सकता है।उदाहरण के तौर पर हमारे ऋषि मुनि इतने लम्बे लम्बे समय तक जीवित कैसे रह लेते थे,योग और ध्यान के माध्यम से ही (ध्यान के बारे मे अलग ब्लॉग लिखूंगी)। योग की शुरुआत भारत मे हुई मानते हैं।योग का जनक महर्षि 'पतंजलि' को माना जाता है।योग अपने आप में सम्पूर...

मेरी शायरी मेरी कविता-शिवानी देशवाल

चित्र
चल जा आजाद कर मुझे उन कसमों की कैद से जो मेने भुलाई नही और तूने निभाई नही ।

मेरी बेटी मुखिया हैअन्तिम भाग-शिवानी देशवाल

चित्र
 नमस्कार दोस्तों   मेरी ईशू ने बचपन मे ही काफी कुछ झेला है और 2साल तक तो कुछ ज्यादा ही,वैसे कहते हैं कि बुरी बाते और यादे दोनो को ही ज्यादा याद नही करना चाहिए। घर मे दूध आता था उसमे से 1किलो दूध अलग कर लेते थे कि पिये या ना पिए काम आ जायेगा इसके, वैसे वो ज्यादा दूध पीती भी नही थी अक्सर उलटी या दस्त हो जाते इसलिये मैं उसे दलिया या सूजी की खीर बना के देती और बच गया तो दही जमा के खिला देती।हालाकि कई बार तो दूध ज्यादा गर्मी मे खराब भी हो जाता कारण था घर के रोज खराब हो रहे माहौल के कारण हम ऊपर के कमरे में शिफ्ट कर गये थे,तो मैं रात को खाना बनाने के बाद दूध उबाल के अपने साथ ऊपर ले आती चूंकि ऊपर केवल एक कमरा था रसोई नीचे ही थी। अक्सर सुबह होते होते दूध खराब हो जाता और मेरी बच्ची भूखी रह जाती। हद तब हुई जब एक दिन एक रिश्तेदार घर आये उन्होने बोला कि लड़की कितनी कमजोर है और शिवानी को तो डिलीवरी के बाद मोटा हो जाना चाहिये था खा पी के पर ये भी कितनी कमजोर हो रही है। जवाब दिया गया की अरे सारा दिन तो खाती रहती हैं दोनो माँ बेटी,और ये लड़की तो 1किलो दूध अकेली पी जाती है।मैं रसोई मे थी मेन...

कूनो में चीते या कूनो के चीते- शिवानी देशवाल

चित्र
 नमस्कार दोस्तों  कूनो में चीते आयें हो मेहमान बनकर नामीबिया या अब कूनो के चीते हो गये हो दोनो ही परिस्थितियो मे ये बात ध्यान रखने योग्य है कि हम उनकी देखभाल कैसे करते हैं। कल सारा दिन टीवी पर एक ही खबर प्रसारित होती रही कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने आठ चीते मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा।खबर अच्छी थी इसलिये देखने मे मज़ा भी आ रहा था कि चलो कुछ तो नया हुआ देश में राजनीति, भ्रष्टाचार, शोषण की खबरों के अलावा कुछ बचा ही नही था न्यूज़ चेनल्स के पास। चीतों की अगर बात करे तो ये चीते बिल्ली की प्रजाति जिसे विडाल कहते हैं क अन्तर्गत आते हैं।ये चीते अपनी तेज़ रफ्तार और अदभुत  फुर्ती के लिये जाने जाते है। जानवरो पर हुए एक सर्वे के अनुसार ये धरती पर रहने वाले सबसे तेज़ जानवर होता है।आपको बताऊँ कि इसकी रफ्तार सुपर कार से भी तेज़ होती है ।ये एक अकेला विडाल वंशी है जिसके पंजे बन्द नही होते जिसकी वजह से इसकी पकड़ कमजोर होती है।शारीरिक बनावट की बात करे तो ये पतली कमर,पतली गर्दन, बड़ी बड़ी आँखो के साथ, सिर छोटा होता है। इसके मुह पर काले रंग के आँसू जैसे दिखने वाले निशान,आखों क कोनो से ...

मेरी शायरी मेरी कविता1-शिवानी देशवाल

चित्र
नमस्कार दोस्तों  आज मे आप सबके लिये मन की बात लाई हूँ, उम्मीद है आपको पसंद आएगी - मन की गहराइयों में जब जब भी झाँका है, तुम्हे, बस तुम्हे, सिर्फ तुम्हे ही पाया है। आज भी जिंदगी में खास मकाम है तुम्हारा, महसूस करती हूँ हर कदम,तू मेरा ही तो साया है। देखते ही देखते ये दिन रात गुज़रते रहते हैं, फिर भी अक्सर मैने तुझे खवाबों में पाया है। मैं ये जानती हूँ अब तुमसे मुलाकात मुमकिन नहीं,  फिर भी जाने कितनी बार मैने तुम्हे बुलाया है । अक्सर यूँ ही रातें कट जाती है, जागते हुए, कुछ सोचते हुए, जिंदगी की वीरानियो का तू ही तो नुमाया है। तेरा यूँ आना वो मिलना वो बातें करना, जाने कितनी ही बार तूने मुझे गले से लगाया है। मेरे गीत मेरी कहानी मेरी बातों में तुम हो,  हाँ हाँ तुम ही, बस तू ही तो मेरा साया है। तेरा जाना, वहाँ जाना और फिर चले ही जाना,  कभी सोचा है ये दर्द हमने किस तरह निभाया है। काश के एक आखिरी मुलाकात हो पाती तुमसे, इस आस में मैने कितना वक्त बिताया है। हाँ तुम ही हो मेरी इस वीरां जिंदगी का माजी,  तुझ पे ही दिलो जां  से ये प्यार लुटाया है। Aj meine apne shivi chaud...

बेटी मुखिया है भाग-4- शिवानी देशवाल

चित्र
नमस्कार दोस्तों  सच बताऊँ तो मैंने एक बात गौर की है कि महिला होने के नाते हमारा संघर्ष ज्यादा होता है जो कि जीवन पर्यन्त चलता रहता है घर हो, ऑफिस हो, ससुराल हो,कही भी, छोटी से छोटी जरूरतें हो या फिर कितने ही जरूरी या गैर जरूरी काम। मैं मानती हूँ कि संघर्ष जरूरी भी कुछ हद तक, कयूकि जब कुछ भी बिना मांगे,बिना मेहनत के मिल जाये तो ना तो उसकी इतनी कद्र होती है और ना ही उसका मूल्य पता चलता है।पर अगर ये संघर्ष महिला होने क नाते ज्यादा है तब तो चिंतन का विषय है। बहू होने के नाते मुझे हर उस चीज या सामान जिसकी मुझे जरुरत थी चाहे वो सम्मान हो, प्यार हो या खाने पीने ,या इस्तेमाल की कोई भी वस्तु,सब मेरे लिये संघर्ष का कारण बन गयी। यहा तक कि अपनी गर्भावस्था के दौरान खाई जाने वाले जरूरी खाद्य पदार्थ जिनसे पोषण मिलता है,क्रेवींग होने पर कुछ भी करने का मन ना करने जैसी समान्य बातो मे भी मुझे बोहोत संघर्ष करना पड़ा (खाना मिल जाता था खुद बनाती जो थी),हाँ कभी कभी छिप छिपाकर कुछ मिल गया तो बात अलग थी वो भी तब जबकि मन तो 4-5 दिन पहले किया था खाने का और मिला आज, इतने दिन मे तो मन और डिमांड दोनो बदल जाते थे...

पर छुप के इस दिल में तन्हाई पलती है- शिवानी देशवाल

चित्र
 नमस्कार दोस्तों   जैसे कि आप सब आज का शीर्षक पहचान ही चुके होंगे की ये गाना नमस्ते लंदन फिल्म का है,गाना और फिल्म दोनो ही मेरे पसंदीदा हैं। पसंद तो हमेशा से ही था पर कभी तह तक नही गयी थी,मेरा भाई अक्सर ये गाना सुनता था तब मेने उससे पूछा था कि तू रोज एक ही गाना कैसे सुन लेता है,उसनेमुझसे कहा ये सच्चाई है दीदी हमारे जीवन की,सुना तो तुमने भी होगा पर आज अपने कानो से नही आत्मा से सुनो और वाकई मुझे उस दिन एहसास हुआ कि जिन्दगी की कितनी बड़ी हकीकत छुपी है इसके बोलों के पीछे। वाकई उस दिन से मेरा नज़रिया बदल गया हर चीज़ के प्रति।  खुद से पूछिये की क्या ये सच नही है,क्या भीड़ केपीछे अकेलापन नही है, कुछ लोग तो भीड़ में भी अकेले हैं।कभी कभी ऐसा नही लगता कि आज कुछ देर अकेले बैठे और खुद से बाते करे,खुद से पूछे कि कैसी हो,बोहोत दिन हो गये खुद के साथ चाय नही पी अपनी कोई प्रिय किताब पढ़ते हुए,खुद की अलमारी नही देखी जिसमे कभी कॉलेज के दिनो मे डायरी छुपा के रखते थे वो डायरी जिसमें जाने कितनी कितनी ही खट्टी मीठी यादें और बाते संजो के रखी हैं उन दिनो की।स्कूल की फोटो एलबम देखें और याद करे कि...

हिंदी दिवस- हिंदी बोलना क्यो है जरूरी?- शिवानी देशवाल

चित्र
 नमस्कार दोस्तों  आज हिंदी दिवस है सबसे पहले हिंदी दिवस की आप सभी को बोहोत बोहोत बधाई। आप सोचेगे कि इसमे बधाई की क्या बात है ये तो हर साल आता है पर आपने शायद ध्यान नही दिया कि अंग्रेजी पढने वाले हमारे बच्चे अब कितना हिंदी बोलते हैं,और लिखने की बात तो आप छोड़ ही दो। दोस्तों हिंदी दिवस हर वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है।वर्ष 1918 में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने हिंदी साहित्य सम्मलेन मे हिंदी को राजभाषा बनाने को कहा था, इसे गाँधी जी ने जन मानस की भाषा भी कहा था। 14 सितम्बर सन 1949 को यानी आजाद भारत की संविधान सभा में यह निर्णय लिया गया कि हिंदी संघ सरकार की अधिकारिक भाषा होगी। हिंदी दिवस पर स्कूल व कार्यालयों में कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं जैसे -निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कविता लेखन,कवि सम्मेलन आदि। इसके द्वारा हमारा उद्देश्य रहता है कि हम अपनी भाषा के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त कर सके। वैसे देखा जाये तो अब हम पूर्णतया हिंदी के शब्दों का इस्तेमाल नही करते बल्कि उसमें अंग्रेजी के शब्द भी मिला देते हैं।कारण है कि जो सँस्कृति हमे हमारे पूर्वजों से विरासत मे मि...

मेरी बेटी मुखिया है (भाग-3)-शिवानी देशवाल

चित्र
 नमस्कार        बेटियाँ हमेशा ही बहुत प्यारी होती है फ़िर वो किसी की भी हो। क्युकि वो हमारी परछाई होती हैं- माँ की परछाई।  मेरी बेटी बोहोत बीमार रही है पैदा होने के बाद से। उसकी जंग पैदा होने के साथ ही खत्म नही हुई थी कई बार एडमिट हुई।मैं  ही उसकी ठीक से केयर नही कर पायी, मेरे केयर ना कर पाने के कारण कई सारे थे, चूँकि इशिता सिजेरियन से हुई थी वो भी विकट परिस्थितियों में तो जितनी हालत उसकी खराब थी उतनी ही मेरी भी थी,किसी ने मेरे ऊपर इतना ध्यान ही न्ही दिया,ऊपर से तो मेरे साथ सब ठीक लग रहा था पर अन्दर शरीर मे जो कुछ चल रहा था उसे सामने आने मे कुछ दिन लग गये। मुझे दर्द तो रहता ही था, पर एक दिन दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया तब डॉक्टर ने बताया कि पानी की कमी की वजह से यूरीन इन्फेक्शन और लीवर इन्फेक्शन हो गया जो कि काफी बढ़ गया है, चूँकि पता चलने के बावजूद भी घर में किसी ने भी मेरी सेहत पर ध्यान नहीं दिया जिस कारण मुझे कमजोरी, शरीर में दर्द, लगातार ब्लीडिंग (जो करीब बीस महिनो तक लगातार चली), हार्मोनल बदलाव, चिड़चिड़ा पन, बढता ही चला गया जिसका पूरा असर मेरी इशित...

मेरा रविवार- शिवानी देशवाल

चित्र
 नमस्कार     कभी -कभी मुझे लगता है कि मेरे लिए भी एक अलग संडे होना चाहिए । मेरा संडे यानि मेरा छुट्टी का दिन।आज का शीर्षक आप लोगों को थोड़ा अलग लग सकता है क्युकी एक तो आज मेरा कोई ब्लॉग नही आया और दूसरा रविवार के  मायने मेरे यानि गृहणी के लिए क्या हैं? आज रविवार था इसलिए ही तो ब्लॉग नही आया। वैसे मैं कुछ लिखती रहती हूँ तो अच्छा और हल्का महसूस करती हूँ। रविवार एक ऐसा दिन है जब घर के सभी सदस्य आराम से काम करते हैं कोई जल्दी नही होती। ना सुबह जल्दी उठने की जल्दी, ना नहाने की जल्दी,ना नाश्ता करने या खाने की जल्दी और मै? मेरे तो सब काम समय पर ही होंगे बल्कि इस दिन काम ज्यादा बढ़ जाते है। पूरे हफ्ते के बचे कुछे काम जो निपटाने पड़ते हैं-जैसे बाज़ार जाना, किसी से मिलने जाना, मिलने जुलने वाले भी सब ज्यादातर संडे को ही आते हैं। बच्चों की अलग-अलग तरीके की फ़रमाइश भी होती है खाने पीने की बाहर घूमने जाने की।मुझे अक्सर ये महसूस होता है कि मेरी जिंदगी में छुट्टी के के मायने केवल तब ही हैं जब हम घर से बाहर जाये वर्ना घर मे तो बाकी सबका संडे मतलब मेरा डबल काम का दिन। अक्सर मेरा संडे...

क्या आज हमारे बच्चों को टेलीविजन देखना चाहिये? -शिवानी देशवाल

चित्र
 नमस्कार        क्या आज के समय में हमारे बच्चों को टेलीविजन देखना चाहिये? आप लोग सोच रहे होंगे कि ये कैसा प्रश्न है? 2022 मे लगभग सभी के घरो में टीवी है,इसलिये 90के दशक की तरह हम बी आर चोपड़ा की महाभारत और रामानंद सागर की रामायण देखने पड़ोसी के घर नही जाते, (वो भी क्या समय था कभी उस बारे मे भी बात करेंगे) अब तो सब अपने अपने घरो मे ही देख लेते हैं। टेलीविजन की सबसे ज्यादा कीमत समझ आई कोविड के दौरान जब सारा वक़्त सब घरों मे कैद  होकर रह गये और मनोरंजन के सभी साधन जैसे-बाहर घूमना फिरना, बाहर खाना-पीना,दोस्तों-रिश्तेदारो से मिलना सब बन्द हो गया,तब लगा की टेलीविजन से अच्छा तो कुछ है ही नहीं।  रामायण तो देखते ही देखते रट गयी, खैर इतने तक तो ठीक था धीरे-धीरे एहसास हुआ कि इन धारावाहिको के अलावा आप ज्यादा कुछ देख नहीं सकते अपने बच्चों या माता-पिता के साथ बैठकर, कारण? कारण ये है कि कब कौन सा विज्ञापन आ जाये फिल्म या सीरियल के बीच कौन सा सीन आ जाये आप बता ही नही सकते।और इस बीच कही आपके बच्चे ने पूछ लिया पापा ये क्या होता है? इसको कहा इस्तेमाल करते है फिर तो आपक...

मेरी बेटी मुखिया है(भाग- 2)- शिवानी देशवाल

चित्र
 नमस्कार  इशिता- यही नाम है मेरी बेटी का।आज वो नौ साल की है,कितना संघर्ष किया था उसने जन्म लेने के लिये। चौबीस घंटों से भी ज्यादा समय तक आहारनाल उसके गले मे लिपटी रही थी,दम घुट रहा था उसका,एक एक सांस के लिए लड़ रही थी मेरी बच्ची। स्थति इतनी भयावह हो गयी थी कि सिजेरियन होने के बाद भी ना तो वो समय से रोईं और ना ही सांस ले पा रही थी।उसका शरीर नीला पड गया था और गले परृ रस्सी जैसे निशान थे ।कई घंटो बाद स्थति सामान्य की तरफ़ आई ।इतना कुछ होने के बाद भी कुछ लोगों को कई सालों बाद तक भी यही लगता रहा कि थोड़ा और इन्तजार कर लेते तो शायद सामान्य डिलीवरी हो जाती। खैर किसी के चाहने या ना चाहने के बावजूद मेरी नन्ही सी परी पहले अपने पापा के और फिर मेरी गोद मे आ गयी।(ये तो सिर्फ शुरुआत है आगे बोहत कुछ  है)            मेरी कहानी सुनाने के पीछे कारण ये है कि ऐसी ही जाने कितनी इशिता मौत से लड़कर रोज जन्म लेती हैं और कितनी ही थक कर जिन्दगी की जंग हार जाती है, और माँ का तो पूछिये ही मत 'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार WHO ने ये माना है कि भारत मे हर घन्टे पाच महिलाओं ...

Why it is mendatory to get success in life- shivani deshwal

चित्र
 नमस्कार          सफलता- ये एक ऐसा शब्द है जो पल भर मे आपको कुछ नहीं से बोहोत कुछ बना देता है। जीवन मे सफल होने के क्या मायने हैं ये कोई मुझसे पूछे।काफी बुरा समय देखा है, जिसकी उमीद खुद मुझे या मेरे पति को भी नही थी। कई बार हम समझ नहीं पाते हम खुद नाकाम है या लोग बना देते है। नाकामयाबी-ये एक ऐसा शब्द है जो आपको सामाजिक ही नही आर्थिक व मानसिक तौर पर भी कमजोर कर देता है तोड़ देता है।कोई साथ नही देता,नाते-रिश्तेदारों की तो बात ही क्या आपका अपना प्यारा परिवार भी आपका साथ नही देता,क्युकि लोग उनसे पूछते हैं कि आपका बेटा क्या करता है तो उनके पास जवाब नही होता।कई बार तो आप सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि मे हूँ कौन मेरा वजूद क्या है? अगर आप कुछ नही करते और आपकी शादी हो जाये फिर तो आपको खुले तौर पर नकारा साबित कर दिया जाता है,  किसी काम क नही रहते,कोइ आपको पूछने वाला नहीं है। हर तरफ से दबाव बनाया जाता है। इससे आपका आत्मविश्वास तो खत्म ही हो जाता है।कोई आपको अपने घर किसी उत्सव या शादी पार्टी मे भी नही बुलाता। लोग आपका हाल चाल लेना बंद कर देता है, कहते हैं कि ठीक ही...