सूरज से सीखें रोज़ आगे बढना- Social

 Namaskar Dosto



सूरज रोज सुबह निकलता है और शाम को छिप जाता है।ये उसका रोज का नियम है। सर्दी हो गर्मी हो या बरसात यहाँ तक की गृहण के समय भी जो की हमारे पुराणो के अनुसार एक जटिल प्रक्रिया है,पर फिर भी ये उसका रोज़ का रूटीन है। प्रकृति द्वारा निर्धारित।हाँ बस उत्तरायण व दक्षिणायन् हो जाता है। 14 जनवरी से 20 जून तक सूर्य उततरायण होते है इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है।जबकि दक्षिणायन् 21 जून से 13 जनवरी तक माना जाता है और कहते हैं कि ये देवताओं की रात होती है।



कितना खूबसुरत है ये रूटीन,अगर आपने ध्यान दिया होगा तो सुबह जब सूर्य निकलता है तो लालिमा लिये होता है और जब छिपता है तब भी लालिमा लिये होता है।जबकि दिन भर मे काई रंग बदलता है जैसे जैसे गर्मी बढती है रंग भी बढ़ते चले जाते हैं। बरसात के समय कितने भी घने बादल हौ आसमान मे कितनी भी तेज़ बरसात होती है पर हल्के से बादल हटते ही सूरज साफ देखा जा सकता है।ऐसे ही सर्दियाँ भी होती हैं तो घने कोहरे के छट जाने पर भी सूर्य देखा जा सकता है । कितना कर्मठ है कभी थकता नहीं है और रोज़ हमे सिखाता है कुछ नया। 

       गृहण भी साल में 2 बार तो लगता ही है उसके बाद फिर से वही सूर्य दिखाई देता है बल्कि पहले से भी ज्यादा चुस्त दुरुस्त।जब बोहोत सर्दी होती है या बोहोत बारिश फिर हम सोचते हैं की बस बोहोत हो गया अब तो सूरज दिखना ही चाहिये। सूर्य हमारी आत्मा का कारक है हमें नयी ऊचाईयां छूने की प्रेरणा देता है और सिखाता है कि अन्धेरा कितना ही घना क्यूँ ना हो रास्ते कितने भी कठिन हो अपनी उम्मीद का सूरज कभी बुझने मत देना वो निकलेगा जरुर बस अपना कर्म करते रहो और निरंतर अपने सदमार्ग पर पूरी ईमानदारीके साथ आगे बढते रहो। कभी थकना नही कभी रुकना नही।

                जब सूर्य निकलता है और छिपता है उसकी अवस्था एक सी होती है इसी प्रकार नवजात शिशु मतलब बाल्यावस्था (बचपन) और वृद्धावस्था ( बुढापा) दोनो ही अवस्थाएं एक सी होती हैं। बिल्कुल भोली मासूम। कमाल की बात है कि हमारा जीवन भी तो ऐसा ही है। इसी तरंह जैसे जैसे दिन चढता है सूरज की रौशनी के साथ साथ गर्मी भी बढती चली जाती है इसी तरह सभी मुश्किलों को पार करते हुए हमारी जिन्दगी आगे बढ़ती है ।

ये कुदरत है रोज हमें आगे बढ़ने की सीख देती है रोज़ हमे कुछ नया सिखाती हैं पर ये हमारे ऊपर है हम इसकी गर्मी को देखकर रुक जाते हैं या कुछ सीख कर आगे बढ़ते हैं और अपने आप को कामयाबी और नई ऊँचाईपर पहुँचाते हैं।

सूरज से सीखो जग को रौशन करना

चांद से सीखो नित आगे बढ़ना 

आसमान के जगमग तारे हमको रोज़ सिखाते हैं 

मुश्किलें कितनी भी हो राहों में तुम कभी ना डरना, तुम कभी ना रूकना।






शिवानी देशवाल 


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