Hello Dosto कुछ दिन पहले की बात है मेरी बेटी इशिता और मैं कुछ लिखने का काम कर रहे थे मेरी बेटी ने मुझसे कहा की मम्मा आप पेन का कैप लगाकर काम करो उससे कैप खोयेगा नही चूँकि मैं हमेशा से ऐसे ही काम करती आई हूँ कैप साइड में रख कर क्युकी मुझे पेन पर कैप लगाने से पेन भारी महसूस होता है, मेने मना कर दिया तो तुरन्त ही मेरी बेटी ने भी पेन का कैप उतार दिया।मेने उससे इसका कारण पूछा तो उसने कहा आपने नही लगाया तो मुझे लगा कुछ तो कारण होगा बस इसीलिए मेने भी उतार दिया। बात पढ़ने और सुनने मे छोटी हो सकती है पर उस रोज़ मेने जो देखा और समझा वो छोटा नही था।मेरी बेटी इशिता 10 वर्ष की हो जायेगी 2 महीने बाद और मैं ये महसूस कर रही हूँ कुछ दिनो से कि वो मुझे काफी follow करने लगी है। ये बोहोत सुखद एहसास है क्युकी मैं हमेशा चाहती थी कि मेरी बेटी मेरी परछाई बने और वो हुआ भी है, पर साथ ही एक डर है एक बात है जो मेरे दिल और दिमाग दोनो पर छा गया है कि बच्चे वही सीखते हैं और वही अनुसरण करते हैं जो उनके माता पिता करते हैं तो क्या माता पिता को अपने तौर तरीकों पर ज्याद...
बात सन 2002की है। मेरा इंटर का परिणाम आया और जाहिर सी बात है कि घर में चर्चा शुरु हो गई आगे की पढ़ाई को लेकर।कई लोगों से पूछ ताछ करने के बाद तय हुआ कि मैं स्नातक करूंगी पर कहाँ से? ये एक बड़ा प्रश्न था क्युकी पापा उस समय सीतापुर जिले के हरगाँव चीनी मिल्स में कार्यरत थे जो कि सीतापुर और लखीमपुर के बीच पड़ती थी तो निर्णय हुआ कि इन्ही मे से कहीं दाखिला लिया जाये।सब को ठीक ही लगा पर मुझे अच्छा नही लगा क्युकी मे इस से पहले यानी इंटर मे भी रोज़ अप डाउन कर चुकी थी जो कि थोड़ा मुश्किल भरा होता है। ये वो चीजें होती हैं जिनसे आप रोज़ नया सीखते तो है पर कई बार कुछ मुश्किलें भी सामने आती हैं। अब अप देखिए कल आपका एक ही विषय पढ़ाया जायेगा, ये बात पहले से जानते हुए भी हमें जाना पड़ता ही था इतनी दूर। सारा दिन इसी में निकल जाता था। कई बार तो शाम हो जाती थी खासकर सर्दियों के दिनो में जब दिन छोटे होते हैं। घर आकर फिर सुबह जाने की तैयारी। इस बार मैं रोज़ आने जाने के लिए तैयार नही हुई। क्युकी कई बाते ऐसी होती हैं जो आप अपने माता पिता से उस समय पर नही बता सकते। ...
उसकी नर्म हथेलियों में जब अपना हाथ रखा तो वो गर्माहट अनजाने ही कितना कुछ कह गई। कह गई कि हां मैं हूँ मैं हूँ तुम्हारा हाथ थामे रहने के लिए हमेशा कभी भी किसी भी परिस्थिति में इसलिए तू थकना मत, रूकना मत, हारना नही क्युकि मैं हूँ तुम्हारी माँ। माँ एक ऐसा शब्द है जिसका ना कोई आरंभ ना ही कोई अंत है, एक ऐसा रूप है जिसकी तुलना आप किसी और रिश्ते के साथ नही कर सकते। माँ के गर्भ में आने से पहले ही हमारा उससे रिश्ता जुड़ जाता है, पहले बोहोत पहले ठीक तब से जब से वो हमारे बारे में सोचना शुरू करती है। हां तब तो किसी को इस बात की परवाह भी नही होती कि वो छुप छुपकर कौन से सपने बुन रही है।और गर्भ में आने के बाद से शुरूआत होती है उन सपनो को सच करने की उन्हे सार्थक बनाने की। और बस यहीं से शुरूआत होती है माँ और बच्चे की पहली दोस्ती की जब से वो बिना बताये ये जानना शुरू करती है कि मेरे बच्चे को क्या खाना है? जिन्हे mood swings ya craving का नाम देते हैं वो असल में शुरूआत होती है उस दोस्ती उस रिश्ते की जिसमें बिना किसी वादे के सभी वादे नि...
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