जन्म का बंधन- शिवानी देशवाल

 भाग 2 से आगे.....

शादी एक पवित्र बँधन क्यूँ मानते हैं,shadi ke fayde, shadi nibhana kyu hai jaruri,



एक अन्य कारण है झूट बोलकर शादी करना। कितनी ही जगह मैंने देखा है लड़के की या लड़कियों की शादी झूट बोलकर या उनके बारे में बढ़ चढ़कर बताकर कर दी जाती है। और जब असलियत दूर दूर तक भी सच होती नही दिखती तो लड़ाई झगडे शुरू हो जाते हैं जो की आगे चलकर अलगाव की स्थति पैदा हो जाती हैं , जैसे - लड़के के कई काम को लेकर, उसकी तनख्वाह ज्यादा बताना, या घर से बाहर रहकर नौकरी करना बताना, या उसके तौर तरीके छुपा लेना, जमीन जायदाद को बढ़ा चढ़ाकर बताना। ऐसा भी कमाल ही है ना कि बोहोत से घरो मे शादी के महिने भर बाद ही लडक़ा ये कहकर घर पर बैठ जाता है कि अब मैं बाहर जाके काम नही करूंगा क्युकि मेरा मन नही लगता या कि मेरा काम ठप्प हो गया है। ऐसा हो सकता है क्या? नही कोरोना जैसी स्थति को छोड़कर। कयूकि वो बाहर कभी गया ही नही। केवल शादी करने के लिए झूठ बोले गये थे।

लड़कियों के घर के काम काज करने को लेकर छुपाना, उसकी तनख्वाह या नौकरी की बात को लेकर झूट बोलना या कई बार दोनो के ही विवाह पूर्व अन्य जगह संबंधों की बात को छुपा लेना जो की बाद तक भी चलते रहते है और फिर विवाह टूटने का असली कारण बनते हैं। 

                हमारी बेटियां बेटों से हर आगे बढ़ रही हैं, पढ़ लिख रही है अपना नाम आगे बढ़ा रही हैं, अपने माता पिता का नाम रोशन कर रही हैं जो की बड़े ही गर्व की बात है ऐसा होना भी चाहिए, आगे बढ़कर अपने फैसले ले रही हैं, पर शायद हम उन्हें घर के काम काज से, अपनी संस्कृति से अपनी जड़ों से दूर कर देते हैं, सीखने ही नहीं देना चाहते। आजकल तो माता पिता कि सोच ये हो गयी है की हमारी बेटी खाना नहीं बनाएगी शादी के बाद। पर क्यों? इसका जवाब भी तो दीजिये फिर। इसका मतलब है कि आपकी नज़रों में खाना बनाने जैसा काम छोटा हो गया? जो महिलाएं घर में रहकर खाना बनाती हैं वो छोटी हैं?

                                                कितने कमाल की बात है की इंसान पैदा होते ही खाना पीना सीख जाता है, सबसे पहले माँ का दूध पीता है, मतलब की आपकी माँ जब तक आपको खाना बना कर देती रही, पकवान खिलाती रही, तब तक वो दुनिया की सबसे अच्छी महिला रही पर जब आपको खुद अपने लिए या अपने बच्चो एक लिये कुछ करना पड़ा तो ये दुनिया का सबसे छोटा काम हो गया जो आपको नहीं करना है क्युकी आप ज्यादा पढ़ी लिखी हैं। तो ये बात अपने पेट को भी बता दिया करो भाई की चूँकि में बोहोत बड़ी हौं तो मुझे भूक न लगे। मैं खुद हॉस्टल में रहकर पढाई करती थी फिर जॉब भी की तो मुझे शादी के बाद खुद ये लगता था शुरुआत में की में ये क्यों करूँ? पर धीरे धीरे  मुझे अच्छा लगने लगा मेरे पति की पसंद का खाना बनाना। भले ही शुरुआत में उतना अच्छा नहीं बना हो पर मैंने कोशिश जारी रखी और सबसे ज्यादा मुझे एहसास हुआ जब मेरी बेटी हो गयी की में नहीं कुछ बनाउंगी तो वो भूखी रह जाएगी तो मैंने सीखा, काफी कुछ अपने पति से कुछ किताबों से और जब से जिओ आया तब से तो बल्ले बल्ले ही हो गई। 

         खैर मेरा सोचना बिलकुल अलग है।  मुझे ये लगता है की आज के समय में हमे अपने बच्चों चाहे वो बेटी हो या बेटा दोनों  को ही  खाना बनाना सीखना चाहिए। दोनों को ही अपनी संस्कृति अपने रिश्ते नातो का महत्व, अपने पूजा पाठ ज़रूर बताना चाहिए, सिखाना चाहिए। लड़कों की तरह लड़कियां भी घर से बहार जाकर काम करती हैं, लौट ते हुए थकन होना स्वाभाविक है तो अगर आप अकेले है तो दोनों को मिलकर एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। माता पिता यदि साथ ही रहते हैं तो दोनों की व्यस्तता को ध्यान में रखते हुए कुछ न कुछ मदद उनको भी करनी ही चाहिए  न की अपने अहम् को आगे लाना चाहियेऔर किसी एक ही इंसान पर सभी ज़िम्मेदारी लादनी चाहिए, सभी के सहयोग से घर चलता है।  आज के समय में कार्य क्षमता बढ़ रही है, लोग ज्यादा व्यस्त हो गए हैं ऐसे में समय का आभाव होंन भी लाज़िमी ही है। समय बदल चुका है।सभी को साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा। 

ज़िम्मेदारी  

जिम्मेदारी की अगर बात करे तो ये सभी की है मा बाप को ये सोच बदलने की जरुरत है की ये तो बच्चे हैं इसलिये शादी के पहले भी बच्चो की राय जरूर लें 

और शादी के बाद उन्हे उनके छोटे छोटे फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता दे और उनकी जीवन मे उतना ही दखलंदाजी करें जितना कि उनकी लाइफ डिस्टर्ब ना हो, बल्कि आपको तो उन्हे समय देना चाहिये ज्यादा से ज्यादा साथ रहने का और आपसी सामंजस्य बैठाने का। बड़े होने के नाते आपका ये फर्ज नही जिम्मेदारी भी है कि आपकी छत्रछाया में किसी के भी साथ नाइंसाफ़ी ना हो। जरूरी नही हर बार गलती आपकी बहू या दामाद की ही हो, कभी अपने बेटा या बेटी की भी गलती मान के देखिए आधी से ज्यादा समस्या तो आपकी घर मे ही सॉल्व हो जाएगी।

शादी एक पवित्र बँधन क्यूँ मानते हैं,shadi ke fayde, shadi nibhana kyu hai jaruri,


इस रिश्ते मे सबसे ज्यादा जिम्मेदारी खुद लड़के और लड़की की होती है, खुद सोच के देखिए अगर ज्यादातर लोगों की शादी टूट जाएगी तो क्या हमारी आने वाली पीढियाँ दूसरी शादी के बारे में सीरियसली सोचेंगी और पहली शादी को मजाक के तौर पर करेंगे। हमारी आपस मे नही बनती या मै किसी और को पसंद करता/करती हूँ या तुम सुन्दर स्मार्ट नही हो कारण कुछ भी हो शादी करने से पहले ही अपना फैसलाखुद लो अपने  स्वार्थ के लिए किसी का भी जीवन दाव पर मत लगाओ।साथ ही अपना अच्छा बुरा सोचो और पहचानो। आजकल शादी के कुछ दिनों बाद ही नये वर वधु में टकराव होने लगता है और वो अलग हो जाते हैं ये तो बिल्कुल ही गलत बात है इतनी जल्दी आप किसी के भी बारे में कैसे राय बना सकते  हैं की कौन कैसा है ।

              एक बात और कहना चाहूँगी कि बातचीत बंद नही होनी चाहिए।दुनिया के बडे से बडे फैसले युध्द के मैदान से गुजर कर भी हल तो बातचीत से हुए हैं।


आखिर मे गलती समाज की भी है,सलाह देने वाले उचित सलाह नही देते। उन घबराये हुए दोनो परिवारों को भटका दिया जाता है, और कुछ लोग तो दो परिवारों के बीच की अन बन का गलत तरीके से इस्तेमाल और अपने फायदे के लिये करने लगते है। कृपया इससे बचे।

जाते जाते आखिरी बात अगर आपके बच्चे नही हुए हैं अभी तक फिर भी ठीक है,पर अगर अपके बच्चे हैंतो अलग होने से पहले उनके मानसिक प्रभाव के बारे मे जरुर विचार करे कि जब आप अपने रिश्ते निभाने मे अक्षम रहे तो वो क्या करेंगे  अपनें रिश्तो के साथ ।

आज फिर खुद को तन्हा देखा है मैने

आखिर मेरे अपने ही मेरे गैर निकले।


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