माता देती है नारी को शक्ति- navratre ki jankari

माता देती है नारी को शक्ति- navratre ki jankari



कल विजयदशमी है आज शारदीय नवरात्र का आखिर दिन यानि की नवमी आज माता वापस चली जाएँगी। हमारे यहाँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांझी लगाई जाती है पितृपक्ष अमावस्या की शाम को या पहले नवरात्र में। सांझी की अगर बात करूँ तो ये मिटटी की बनी छोटी सी मूर्ति रूप होती हैं जिनको स्थापित नहीं किया जाता बल्कि गाय के गोबर की सहायता से दिवार पर लगाया जाता है इनके साथ इनका एक भाई भी होता है उसको भी थोड़ा नीचे करके लगाया जाता है और साथ में नवगृह भी लगाए जाते है। इनको रोज नियम से पूजा जाता है सुबह दोपहर और शाम को भोग लगाया जाता है। जो भी शुद्ध सात्विक भोजन अपने घर में बनाया होगा साथ में घी में बूरा मिलकर रोज भोग जरूर लगते है। घी बूरा का भोग लगाने का एक खास मतलब है दरअसल हमारे यहाँ पुराने ज़माने में जब भी कोई मेहमान घर आता था तो उन्हें खाने के साथ घी बूरा जरूर खिलाते थे ऐसा मन जाता रहा है की इसका मतलब होता है की रिश्तो में मिठास बनी रहे और इसी तरह हमारे यहाँ मेहमान आते रहे। इसे बड़ी खास मेहमान नवाज़ी माना जाता था।
                                                                   बस इसी तरह सांझी माता को घी बूरा का भोग लगाकर ये मानते है माता हर साल आती रहे इसी तरह से खुशियां लेकर खुशहाली लेकर। सारी कॉलोनी की छोटी छोटी लड़कियां घर घर जाकर रोज शाम को माता की आरती करती है और भजन गाती हैं उसके बदले सभी घरों के लोग उन्हें रोज कुछ पैसे देते हैं ऐसा रोज होता है पूरे नौ दिन तक, और फिर दसवे दिन, दिन में दशमी पूज कर शाम के समय भोग लगाकर लेकर जाते हैं और विसर्जित कर देते है ये मानकर की माता अगले साल फिर आएंगी हमे अपना आशीर्वाद देने।
                                                            खैर अब धीरे धीरे ये परम्पराएँ कहीं विलुप्त होती जा रही हैं। नए नए रूप में अलग अलग तरीके से पूजन होने लगा है सभी अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ काम कुछ ज्यादा करके माँ को मना ही लेते हैं। माता दुर्गा के नौ रूप जिस तरह से अलग अलग सीख देते हैं उससे यही सीखने को मिलता है की नारी के भी अलग अलग रूप होते है वो एक ही समय पर कन्या, बेटी, पत्नी, बहु, माँ, सास, पड़ोसन , सहेली, कितने रूपों में होती है, पर इतनी शक्ति आती कहा से है? 


क्या आपको पता है भगवन राम ने भी रावण वध से पहले माता की पूजा की थी। नौ दिन तक पूजन करने के बाद दसवे दिन ही रावण वध संभव हो सका था। वैसे हो भी क्यों ना राम नाम ही सीता के बिना अधूरा है, श्याम का नाम भी राधा के बिना अधूरा है, शिव शक्ति का एक और रूप जिसे पूरा जग पूजता है वो है अर्ध नारीश्वर रूप जो की स्पष्ट रूप से से पति और पत्नी रिश्ते को दिखाता है साथ ही ये भी दर्शाता है की शक्ति के बिन शिव अधूरे और शिव के बिना शक्ति।


                                                       मतलब की नारी के बिना पुरुष शक्तिहीन है और और पुरुष के बिना नारी।दोनों एक दूसरे की शक्ति होने साथ साथ एक दूसरे की प्रेरणा भी है। सुख दुःख के साथी।ऐसा ही होता है यही सच भी है कि पृथ्वी पर संतुलन बनाये रखने के लिये शिव और शक्ति दोनों जरुरी हैं।



दोस्तों आपको आज का मेरा बलाँग कैसा लगा।
Shishu9.blogspot.com 
Shivi chaudhary vlogger पर मुझे youtube पर भी देखें
Shivani deshwal se facebook pat
Aur shivanideshwal.353 se instagram par follow kare.













टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुछ जरूरी बातें- educational

Meri beti ne jo mujhe sikhaya- shivani deshwal

Shadi Ek Pavitra Bandhan Hai(Bhag -1)- shadi ke mayne