Shadi Ek Pavitra Bandhan Hai(Bhag -1)- shadi ke mayne

नमस्कार दोस्तों 
Shadi Ek Pavitra Bandhan Hai- shadi ke mayne


                                                   कुछ दिन पहले हमारे एक रिश्तेदार का फ़ोन आया उनका अपनी पुत्रवधु से कुछ विवाद चल रहा है जो कि अपने मायके में रह रही है पिछले छह महीने से उसके 2 बच्चे भी हैं, उनके हिसाब से हमने उसके परिवार से बात करने की कोशिश की है पर वो लड़की हर बार ससुराल में झगड़ा करती है और अपने मायके में जाकर बैठ जाती है और उसके माता पिता अपनी बेटी का गलत में भी साथ देते है।और हम लोग जब भी बात करने की कोशिश करते है तो उसके माता पिता हमसे गलत तरीके से बात करते हैं,७ साल शादी को हो गए। और पहले दिन से ही कुछ न कुछ विवाद चल रहा है, हर बार तो मेरा बेटा उसको मनाकर ले आता था 1 -२ महीने में पर इस बार बेटे ने भी मना कर दिया उसको लाने से। तो विवाद लम्बा खिंच गया है अब हम क्या करें? ये इनका कहना है मतलब एकतरफा बात पता है हमें अभी। और फ़िर अपनी ग़लती तो क़ोई बताता ही नही है।



                                                   मुझे नहीं पता गलती किसकी है और क्यों है पर मुझे तरस आया उन दो अबोध बच्चों पर जिन्होंने पैदा होते ही अपने माता पिता के रिश्ते को अलग नज़र से देखा। जो कभी समझ ही नहीं पाए की मम्मी पापा एक साथ खुश रहते कैसे हैं? कोई उनके बालक मन से भी तो पूछे की उनके मन में चल क्या रहा है? कुछ ही समय वो पापा के साथ रहते हैं बाकि समय नानी के घर रहते हैं तो उनके दिमाग में पापा की इमेज क्या बन रही होगी की पापा विलेन हैं और मेरी मम्मी है और उनका परिवार बेचारे है और पापा जुल्म करते हैं। अपनी अपनी ईगो के चक्कर में किसी ने भी उस 5 साल के बेटे और ३ साल की बेटी के बारे में सोचा ही नही।



                                                       ये समस्या आजकल केवल एक घर की ही नहीं रह गयी। मुझे लगता है ये ज्यादातर परिवारों की समस्या हो गयी है। खुद मेरे जानने वालों में ऐसे कितने घर मौजूद हैं जहाँ या तो बेटे बहु के विवाद चल रहे हैं या सास ससुर के बहु से या सास के बहु से, रूप कुछ भी हो पर विवाद तो हैं। अगर आपको हकीकत जाननी ही है तो अदालतों में जाकर देखिये और अदालतों तक भी सभी शायद सभी विवाद नहीं पोहोच पा रहे ज्यादातर आपस में ही समझौता करके निपटा लिए जाते हैं। पर इसका कारन क्या है? ये क्यों हो रहा है? इतनी गंभीर समस्या आखिर उत्पन्न हो कैसे गयी?
                                        


                                                         हमारे देश में जहाँ पति और पत्नी का रिश्ता केवल कहने भर का नहीं होता वरन सात जन्मों का होता है। अग्नि के चारों और फेरे लेकर रिश्ते को जन्म जन्मांतर के बंधन में परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में बांध दिया जाता है फिर परेशानी क्या है? किसकी गलती है और गलती है भी तो इतनी बड़ी मात्रा में गलती हो भी क्यों रही है? शादी करते समय दोनों ही परिवार दिखावे के लिए कितनी बड़ी मात्रा में खर्च करते हैं लोगो को इकठ्ठा करते हैं। लड़की वालो के लिए तो शादी ब्याह उत्सव कम और बोझ ज्यादा लागत है की कहीं हमसे कोई गलती न हो जाये और इसका बदला कल को हमारी बेटी से न लिया जाये। पैसा पानी की तरह बहा दिया जाता है, कहीं उधार लेकर कहीं क़र्ज़ लेकर और कहीं ब्याज पर पैसे लेकर बेटी की शादी निपटाई जाती है( निपटाई? जी हाँ ऐसी शादियों को निपटना ही कहा जाता है जहाँ एक पक्ष पूरी तरह से दबा दिया जाता है)।

                                                          बड़े ही अचरज की बात है की ऐसा हो क्यों रहा है। क्या कोई भी एक बार ये नहीं सोचना चाहता की आखिर इन विवादों का अंत कहाँ है? पहले कहीं कहीं किसी घर में ही सुनने में अतः था की उसकी लड़की को छोड़ दिया है उसके ससुराल वालो ने क्युकी उस समय ये इज्जत का पृश्न माना जाता था। इसलिए जब भी कुछ विवाद होते थे तो उन्हें चुपचाप घर में बैठकर सुलझा लिया जाता था या लड़की के माता पिता को बुलाकर उनसे भी शांति से समझौता कर लिया जाता था और फिर चुप चाप बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से दूसरा विवाह कर दिया जाता था। उस समय गाँव की एक बेटी पूरे गांव की बेटी समझी जाती थी इसलिए उस पर कोई आँच आए उससे पहले ही सभी लोग मिलकर उसका हल ढून्ढ लेते थे।


शेष अगले अंक में 















                                                  

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