पूर्वोत्तर सीमा पर हॉवित्जर तोप तैनात
चीन से जारी गतिरोध के बीच भारतीय सेना ने 1300 किलोमीटर लम्बी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल ए सी LAC) पर अरुणाचल प्रदेश में एम् -777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप तैनात की है, सबसे ख़ास बात ये है की ये इतनी हलकी है की जरुरत पड़ने पर इन्हे चिनूक हेलीकॉप्टर या टृक से कही भी लेकर जाया जा सकता है, बोफ़ोर्स टॉप 11 टन वज़नी होती थी इसलिए उन्हें ऊँचे पहाड़ों पर ले जाने में कुछ परेशानियाँ होती थी (हालाँकि कारगिल युद्ध के समय इन्होने युद्ध जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी इसलिए उसकी महत्ता को काम करके नहीं आँका जा सकता), परन्तु अब भारत को भी अपग्रेडेड और एडवांस टेक्नोलॉजी से निर्मित्त टाइटेनियम से बनी हॉवित्जर तोप 4.4 टन की है, लेह, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के 16 हज़ार फीट से ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में भी इन्हे तैनात किया जा सकता है,
खासियत
- अमेरिका को 2016 में 145 हॉवित्जर तोपों का ऑर्डर दिया गया था, जिसमे से 125 अब तक मिल चुकी
- 2018 में इन्हे भारतीय सेना में शामिल किया गया
- पोकरण फ़ील्ड फायरिंग रेंज में परीक्षण सफल रहा है,
- एक मिनट में 7 गोले दाग सकती है, 40 किलोमीटर तक अचूक निशाना लगा सकती है
- इन तोपों में डिजिटल फायर कंट्र्रोल सिस्टम और जी पी एस लगा है
- आधुनिक होने के साथ साथ पुराणी तोप से 41 % हल्की है
पहाड़ी इलाको के लिए ये काफी महत्वपूर्ण है क्युकी वज़न में हलकी होने के साथ साथ दूर तक मारक क्षमता रखती है, चीन ने अरुणाचल प्र्देश तक फैले 3. 488 किमी एल ए सी के साथ कई नयी हवाई पट्टियाँ व् हेलिपैड भी बना लिए है, कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन पूर्वी लद्दाख में अपने सैन्य ठिकानो और एयरबेस के निर्माण में जुटा है, पिछले दिनों सॅटॅलाइट से दिखाई गयी तस्वीर के अनुसार चीन ने पूर्वी सीमा के नजदीक गाँव बसा लिया है हालाँकि भारत के ऑब्जेक्शन करने के बाद से चीनी सेना को 15 किमी पीछे हटना पड़ा और अवैध निर्माण बी तोडना पड़ा, यहाँ तक कि चीन ने cctv कैमरे भी लगा दिए थे जिससे भारतीय सैनिको पर नज़र रख सके वो भी हटा लिए गए हैं,
जून 2020 में गलवान घाटी में रात को 8 घंटे तक चली खूनी झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, तभी से भारतीय रक्षा मंत्रालय व् हमारी सेना लगातार चीन पर कड़ी नज़र बनाये हुए है, इस घटना के बाद से भारतीय सैनिक जो कि हमेशा से ही अपनी वीरता और बहादुरी के लिए जाने जाते हैं, का एक और नया सम्मानित रूप सामने आया था, हमारे २० सैनिक शहीद हो गए थे , जबकि चीन ने तो अपने मृत सैनिकों की संख्या बताने से ही इंकार कर दिया था जिससे चीन की बोहोत किरकिरी हुई थी, जबकि मृत सैनिको के शव खुद भारतीय सैनिको को सौपें थे,
ऑस्ट्रेलियन न्यूज़ पेपर 'द कलेक्सन ' में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार चीन के कितने ही सैनिक गलवान नदी में बह गए थे जिसकी बात बतानी तो दूर चीन चीन ने कबूली भी नहीं थी
खैर चीन के नए नए रूप समय समय पर सामने आते रहते है, भारतीय सेना अपनी सीमाओ की रक्षाः करने में हमशा ही सक्षम रही है, हॉवित्जर टॉप इसमें मददग़ार साबित होगी
Shivani Deshwal
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