आगे बढ़ना जरुरी है पर अपनो के साथ
कितनी ही बार हम सफलता के पीछे भाग भागकर इतने असफल हो जाते हैं कि हमें खुद पता नही चलता की क्या पाने के लिए घर से निकले थे और क्या क्या खोकर लौटें हैं। ऐसा होता है और सच भी है। आगे बढ़ना कई बार हमारी मजबूरी से ज्यादा जरुरत बन जाता है और हम सफलता के पीछे भागते रहते हैं बिना पीछे मुड़कर देखे हुए या ये सोचते हुए कि कोई बोहोत अपना कोई खास मित्र कहीं चाय की दुकान पर खड़ा आज भी मेरा इंतज़ार कर रहा होगा और मुझे घर जाने से पहले उससे मिलकर उसके साथ मन ना होते हुए भी एक ग्लास चाय पीकर तो जाना ही है।
सफल होने की दौड़ में जिस तरह से असफलताएँ पीछे छूट जाती है ठीक इसी प्रकार और भी बोहोत कुछ पीछे छूट जाता है। नये साथी मिलते हैं तो पुराने दोस्त छूट जाते हैं, नयी गाड़ी मिलती है तो पुरानी जान से भी ज्यादा जिसकी रक्षा करते थे, जिस पर गर्लफ्रेंड को बिठाकर शान से घूमते थे वो बाईक कहिं पीछे बोहोत पीछे छूट जाती है। बाॅस मिलते हैं तो माँ बाप पीछे छूट जाते हैं।
हमारी वो सुकून की नींद जो स्कूल जाने से पहले आती थी या कॉलेज जाने से ठीक पहले लगने वाली झपकी जो अक्सर पहली क्लास का लेक्चर तो मिस करा ही देती थी और फिर पड़ती थी दोस्तों की जमकर डाट जो की लगभग रोज की ही आदत थी। कभी कॉलेज बंक करके दोस्तों के साथ बाइक से घूमने निकल जाना या कोई नई मूवी देखकर आना और वहाँ पर किसी रिश्तेदार का देख लेना, सारा रास्ता तो इसी उलझन में कट जाता था कि कहिं उन्होने घर में बता दिया तो क्या कहूँगा मम्मी से और पापा तो मार ही डालेंगे।
जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं बचपन पीछे छूट जाता है। हम मम्मी पापा से जिद करनी बंद कर देते हैं अपनी बाते मनवानी बंद कर देते हैं। और तो और हमारे शौक तक पीछे छूट जाते हैं क्युकी कामयाबी अक्सर नींद और शौक दोनो को पीछे छोड़ देती है। सफल होना बोहोत जरुरी है कयूकि इसके बिना हमारे होने के कोई मायने नही हैं, जीवन में लक्ष्य होना जितना जरुरी है उससे कहिं ज्यादा जरुरी है उस लक्ष्य को पाने की कोशिश करते रहना।पर बस इस शर्त के साथ आगे बढ़ना की कल को जब पीछे मुड़कर देखो तो खुद को ही कहीं पीछे ना छोड़ दो। अकेले आगे बढ़ने से बेहतर है अपने अपनो को और उनके भी सपनो को साथ लेकर आगे बढा जाए तभी उस कामयाबी के असली मायने हैं।
@shishu9.blogspot.com
Shivani Deshwal

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