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मेरी बेटी मुखिया है(भाग 1)- शिवानी देशवाल

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 नमस्कार   कुछ दिन पहले एक समाचार पत्र में पढा की मुकेश अंबानी ने अपनी बेटी ईशा का परिचय अपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिटेल कारोबार की मुखिया के तौर पर कराया है ।यह पितृसत्ता प्रधान समाज को दिखाया गया आईना है ।इसके साथ ही एक तस्वीर भी छपी थी जिसमे मुकेश अंबानी उनकी पत्नी नीता अंबानी व बेटी ईशा भी थी। इस तस्वीर का शीर्षक था-मेरी बेटी मुखिया है।           मैं दो बच्चों की माँ हूँ,जिसमे से एक बेटी है।जब मेरी बेटी पैदा हुई थी तो परिवार क ज्यादातर लोगों को खुशी कम ही हुई थी,जबकि वो अपने परिवार मे अकेली बेटी थी अपनी बुआ के बाद।उसके जन्म के बाद ना तो कोई मिठाई बाँटी गयी, ना ही मेहमानो को बुलाकर कोई उत्सव मनाया गया।सच तो ये है कि यह स्थति हमारे जैसे जाने कितने परिवारो की होगी क्यूकि हमारे देश मे बेटियो की स्थिति ज्यादा अच्छी नही है।मैं खुद भी एक औरत हूँ इसलिये समझ सकती हूँ कि पैदा होने से लेकर अन्तिम साँस तक हमे खुद क लिये कितना संघर्ष करना पड़ता है, और फिर यही दौड़ धूप शुरु होती है खुद की बेटी क लिये।          इस भाग मे केवल इतना ही,...

Life of a housewife- shivani Deshwal (social)

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नमस्कार          मेरा नाम शिवानी है और मै एक गृहणी हूँ ।यूँ तो मेरी जिंदगी कई लोगों को बोरिंग लगेगी,बहुतों को तो ये भी लग सकता है की करती ही क्या है दिन भर, झाडू पोछा बर्तन तो बाई आके कर देती है फिर काम ही क्या है बस दिन भर सोती ही तो रहती हो।फिर भी अक्सर सारा दिन सोने के बाद जब रात को फिर सोने जाती हूँ तो नींद आखों से गायब हो जाती है कभी ये सोचते हुए कि कल क्या बनेगा खाने मे या कभी पैर और कमर मे दर्द के कारण।अब तो ये अंदाजा लगाना भी मुश्किल है की ऐसा दिन भर सोने के कारण होता है या बिल्कुल ना सोने के कारण या शारीरिक कमजोरी क कारण।खैर कोई कुछ भी सोचे मुझे फर्क नही पड़ता क्युकि मेरे पति तो कम से कम ऐसा नही  सोचते ।वैसे अक्सर लोगों की गृहणीयो को लेकर यही राय होती है।पर सोचा जाये हमारी जिन्दगी ज्यादा मुश्किलों भरी या चेलेन्जिंग होती है कयूकि हमारी नज़र इस बात पर होती है कि घर मे सभी के काम सही समय और सही तरीके से हो जाये ।हम घर और बाहर के सभी कार्य आराम से बिना किसी शिकायत किये आसानी से निपटा लेते है जिनको करने के लिये ना केवल शारीरिक वरन मानसिक मजबूती की भी जरूर...

स्वस्थ रहें मस्त रहें -social sandesh

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 नमस्कार,   आज क समय मे स्वस्थ रहना हमारी आदत ही नही हमारी जरुरत बन गई है।आज जब हर तरफ प्रदूषण इस क़दर बढ़ चुका है कि खाने पीने की चीजें,पानी और तो और हवा भी शुद्ध नही बची है,खुद को स्वस्थ रखना बोहोत बड़ी चुनौती बन गया है।समय समय पर नयी नयी बीमारियाँ जनम ले रही हैं जो हम सबको अपनी चपेट मे ले रही है। इसके कई कारण भी हैं और जाने अनजाने हम जिम्मेदार भी।हमारे बडे बुजुर्ग कितने स्वस्थ रहते थे।मेरी दादी नानी कभी बीमार नही होती थी साथ ही उनकी त्वचा और बालो मे एक अलग ही चमक रहती थी जबकि वो लोग तो क्रीम और शैम्पू का इस्तमाल भी नही करती थी।उनका शुद्ध खान पान,नियमित दिनचर्या उनकी अच्छी  सेहत और स्वस्थ शरीर का राज होता था।                    आज हम खुद को देखें तो हम लोग बन्द थैली के सामान पर निर्भर हो गए है।स्वस्थ खाने की जगह जंक फ़ूड,एनर्जी ड्रिंक ने ले ली है ।इसका सीधा असर हमारे शरीर,मन व सोच पर पड़ता है।हम ज्यादा हिंसक और उग्र हो गये है।अगर  चाहे तो इन सब से अभी भी बाहर आ सकते हैं।सर्व प्रथम अपना रूटीन सेट करे,जब भी समय मिले योग...

लिखना क्यो जरूरी है - social sandesh

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many times we are not able to tell our mind to anyone, we think that people are making fun of our personnel life .we keep choking inside. many times it seems that we will get depressed. all the roads to be closed then we should resort writing. writing not only makes the mind lighter  , but new, attractive and positive thoughts come to mind.new paths open up.some new memories are also formed.whatever bitterness or anger is in the mind, all that ends. make your own diary and write your daily routine in it. write your happy moments along with your sadness. writing is not an art, but with constant effort it becomes an art.                         after a few years, when you will come out of every situation, when you turn those pages of your diary, you will find that you have so many precious memories in your life in the form of that diary.